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मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों के वेतन पर 6 महीने की अस्थायी रोक, अधिसूचना जारी

Shantanu Roy
18 April 2026 3:16 PM IST
मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों के वेतन पर 6 महीने की अस्थायी रोक, अधिसूचना जारी
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Shimla. शिमला। हिमाचल प्रदेश में राज्यपाल की ओर से एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लिया गया है। राज्यपाल ने अपनी संवैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों के वेतन का एक हिस्सा आगामी छह महीनों के लिए अस्थायी रूप से रोकने का आदेश जारी किया है। इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी गई है, जिसके बाद यह निर्णय तुरंत प्रभाव से लागू माना जा रहा है।
जारी अधिसूचना के अनुसार मुख्यमंत्री के वेतन में 50 प्रतिशत की अस्थायी कटौती की गई है। वहीं उपमुख्यमंत्री के वेतन में 30 प्रतिशत और राज्य के सभी विधायकों के वेतन में 20 प्रतिशत की अस्थायी रोक लगाई गई है। यह निर्णय छह महीने की अवधि के लिए प्रभावी रहेगा, जिसके बाद स्थिति की समीक्षा के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा। सरकारी सूत्रों के अनुसार यह कदम वित्तीय अनुशासन और राज्य की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। प्रशासनिक स्तर पर यह भी माना जा रहा है कि इस निर्णय का उद्देश्य सरकारी खर्चों को नियंत्रित करना और राजस्व पर दबाव को कम करना है। हालांकि आधिकारिक रूप से अधिसूचना में इसके पीछे विस्तृत कारणों का उल्लेख सीमित रूप में किया गया है।
इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इस निर्णय को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार समर्थकों का कहना है कि यह अस्थायी कदम है और राज्य की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में सहायक हो सकता है। वहीं कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय आने वाले समय में प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर प्रभाव डाल सकता है। अधिसूचना जारी होने के बाद संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे वेतन भुगतान की प्रक्रिया में आवश्यक संशोधन करें और नए आदेशों के अनुसार ही भुगतान सुनिश्चित करें। इसके अलावा सभी संबंधित रिकॉर्ड को अद्यतन करने के लिए भी कहा गया है।
राज्य विधानसभा और सचिवालय स्तर पर भी इस निर्णय को लेकर चर्चाएं जारी हैं। कई विधायकों ने इस कदम को अस्थायी और प्रशासनिक निर्णय बताया है, जबकि कुछ ने इसे आर्थिक दबाव से जुड़ा हुआ कदम माना है। हालांकि सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि यह निर्णय केवल निर्धारित अवधि के लिए है और परिस्थितियों के अनुसार इसमें बदलाव संभव है। फिलहाल इस आदेश के लागू होने के बाद राज्य के शीर्ष संवैधानिक पदों पर बैठे जनप्रतिनिधियों के वेतन में निर्धारित कटौती प्रभावी हो गई है। आने वाले महीनों में इस निर्णय के प्रभाव और राज्य की वित्तीय स्थिति पर इसके असर को लेकर नजरें बनी रहेंगी।
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