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खम्मम में तेलंगाना का पहला e-POR सिस्टम शुरू

Harrison
30 April 2026 9:52 PM IST
खम्मम में तेलंगाना का पहला e-POR सिस्टम शुरू
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Khammam खम्मम : वन अपराधों की निगरानी और कानूनी कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाने के लिए तेलंगाना में एक नई डिजिटल पहल की शुरुआत की गई है। खम्मम वन विभाग ने राज्य का पहला e-POR (इलेक्ट्रॉनिक पंचनामा ऑफ ऑफेंस रिपोर्ट) पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया है। इस सिस्टम का उद्देश्य वन अपराधों के रिकॉर्ड को डिजिटल बनाकर पारदर्शिता और कानून प्रवर्तन को मजबूत करना है।
यह नई व्यवस्था पुलिस FIR सिस्टम की तर्ज पर तैयार की गई है, जिसमें वन अपराधों से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग, दस्तावेजीकरण और ट्रैकिंग पूरी तरह ऑनलाइन की जाएगी। इससे न केवल प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि रिकॉर्ड रखने में होने वाली त्रुटियों को भी कम किया जा सकेगा।
इस पहल के तहत वन विभाग के अधिकारी अब मौके पर ही डिजिटल माध्यम से अपराध का पंचनामा तैयार कर सकेंगे और उसे तुरंत सिस्टम में दर्ज कर पाएंगे। इससे कागजी प्रक्रिया पर निर्भरता कम होगी और कार्रवाई में तेजी आएगी।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस डिजिटल प्रणाली से अवैध कटाई, वन्यजीव अपराध और अन्य वन संबंधी उल्लंघनों की निगरानी अधिक प्रभावी तरीके से की जा सकेगी। साथ ही, मामलों की जांच में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
इस प्रोजेक्ट को तेलंगाना सरकार की डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीक के उपयोग से वन संरक्षण और कानून प्रवर्तन दोनों क्षेत्रों में सुधार आएगा।
e-POR सिस्टम के माध्यम से सभी रिकॉर्ड एक केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगे, जिससे वरिष्ठ अधिकारियों को रीयल-टाइम में मामलों की जानकारी मिल सकेगी। इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया भी तेज और अधिक सटीक होगी।
वन विभाग का मानना है कि इस प्रणाली से फील्ड स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और उन्हें रिपोर्टिंग में आसानी होगी। इसके अलावा, डेटा विश्लेषण के माध्यम से वन अपराधों के पैटर्न को समझने में भी मदद मिलेगी।
खम्मम में शुरू किया गया यह पायलट प्रोजेक्ट आने वाले समय में राज्य के अन्य हिस्सों में भी लागू किया जा सकता है। यदि यह सफल रहता है, तो यह पूरे तेलंगाना में वन कानून प्रवर्तन प्रणाली को डिजिटल रूप से बदल सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की तकनीकी पहलें न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ाती हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को भी मजबूत करती हैं।
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