भारत
राज्यपाल के पास लंबित बिलों के मामले में तेलंगाना सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में लगाई गुहार
jantaserishta.com
12 March 2023 1:05 PM IST

x
फाइल फोटो
हैदराबाद (आईएएनएस)| तेलंगाना में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं और राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन की ओर से राज्य विधानमंडल द्वारा पारित कुछ विधेयकों को मंजूरी देने में देरी से शासन में बाधा उत्पन्न होने की संभावना है। सत्तारूढ़ भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने समस्या के समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट पर नजरे गड़ाई है।
बीआरएस नेता चुनी हुई सरकार को कमजोर करते हुए एक समानांतर व्यवस्था चलाने के लिए राज्यपाल को निशाना बना रहे हैं।
लंबित बिलों पर गतिरोध और बीआरएस सरकार द्वारा पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका ने सरकार और राज्यपाल के बीच गतिरोध को एक अभूतपूर्व मोड़ दे दिया है।
बीआरएस को उम्मीद थी कि पिछले महीने राज्य विधानमंडल के बजट सत्र के दौरान हुए संघर्ष विराम के साथ, सुंदरराजन विधेयकों को मंजूरी प्रदान कर देंगी। इनमें से कुछ पिछले साल सितंबर से लंबित हैं।
लेकिन राजभवन से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर, बीआरएस ने विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर करके मामले को सर्वोच्च न्यायालय में ले जाने का फैसला किया।
सरकार ने शीर्ष अदालत से गुहार लगाई कि राज्यपाल को 10 लंबित विधेयकों को मंजूरी देकर अपने संवैधानिक दायित्व को पूरा करने का निर्देश दिया जाए।
एसएलपी में कहा गया है कि इनमें से सात विधेयक पिछले साल सितंबर से राजभवन में लंबित हैं, जबकि अन्य तीन को विधानसभा का बजट सत्र समाप्त होने के बाद 13 फरवरी को राज्यपाल के पास भेजा गया था।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से राज्यपाल द्वारा देरी को 'अवैध', 'अनियमित' और 'असंवैधानिक' घोषित करने की गुहार लगाई गई।
एसएलपी ने कहा, तेलंगाना सरकार राज्यपाल द्वारा पैदा किए गए गतिरोध के कारण अदालत के समक्ष जाने के लिए विवश है। राज्य विधानमंडल द्वारा पारित कई विधेयकों राज्यपाल के पास लंबित हैं।
याचिका में कहा गया विधेयकों को स्वीकृति न देने कोई कारण नहीं है। क्योंकि सभी विधेयक संवैधानिक जनादेश के अनुरूप हैं।
राज्य सरकार ने समशेर सिंह बनाम पंजाब राज्य मामले का उल्लेख किया, जहां शीर्ष अदालत ने कहा था कि संविधान में राज्यपाल को मंत्रिपरिषद की सलाह के खिलाफ जाने की अनुमति देकर एक समानांतर प्रशासन के प्रावधान की परिकल्पना नहीं की गई है।
इसने यह भी कहा कि अनुच्छेद 200 राज्यपाल को कोई स्वतंत्र विवेक प्रदान नहीं करता, जैसा कि संविधान सभा की चर्चा से स्पष्ट है।
राज्य सरकार ने तर्क दिया कि यह मामला अभूतपूर्व महत्व रखता है और किसी भी तरह की देरी से बहुत अप्रिय स्थिति पैदा हो सकती है, अंतत: शासन को प्रभावित कर सकती है और परिणामस्वरूप आम जनता को भारी असुविधा हो सकती है।
राज्य विधानसभा ने 12 और 13 सितंबर को हुए सत्र के दौरान सात विधेयकों को पारित किया था। राज्यपाल ने केवल जीएसटी (संशोधन) विधेयक पर अपनी सहमति दी।
राजभवन के पास लंबित बिल हैं - आजमाबाद औद्योगिक क्षेत्र (पट्टे की समाप्ति और विनियमन) (संशोधन) विधेयक, 2022, तेलंगाना नगरपालिका कानून (संशोधन) विधेयक, 2022, तेलंगाना लोक रोजगार (सेवानिवृत्ति की आयु का विनियमन) (संशोधन) विधेयक, 2022, यूनिवर्सिटी ऑफ फॉरेस्ट्री तेलंगाना बिल, 2022, तेलंगाना यूनिवर्सिटी कॉमन रिक्रूटमेंट बोर्ड बिल, 2022, तेलंगाना मोटर वाहन कराधान (संशोधन) विधेयक, 2022, तेलंगाना राज्य निजी विश्वविद्यालय (स्थापना और विनियमन) (संशोधन) विधेयक, 2022, प्रोफेसर जयशंकर तेलंगाना राज्य कृषि विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2023, तेलंगाना पंचायत राज (संशोधन) विधेयक, 2023, और तेलंगाना नगर पालिका (संशोधन) विधेयक, 2023।
नगरपालिका कानून विधेयक लंबित होने के कारण, सरकार पार्टी नेताओं द्वारा नागरिक निकायों के अध्यक्षों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने से चिंतित है।
कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि राज्य सरकार तब तक कुछ नहीं कर सकती जब तक कि राज्यपाल उसे विधेयक वापस नहीं कर देते। यदि विधेयक लौटाए जाते हैं, तो राज्य सरकार के पास उन्हें अनुमोदन के लिए फिर से भेजने की शक्तियां होती हैं, जिसे राज्यपाल द्वारा अस्वीकार नहीं किया जा सकता है।
सुंदरराजन ने टेलीविजन चैनलों में बहस में भाग लेकर बीआरएस सरकार को निशाना बनाकर विवाद खड़ा कर दिया और ट्विटर पर राज्य के मुख्य सचिव पर निशाना साधा।
सुंदर राजन ने ट्वीट किया, प्रिय तेलंगाना सीएस राजभवन दिल्ली की तुलना में वह अधिक निकट हैं। सीएस के रूप में पदभार संभालने के बाद आपको राजभवन जाने का समय नहीं मिला। कोई प्रोटोकॉल नहीं! शिष्टाचार भेंट के लिए भी कोई शिष्टाचार नहीं।
शांति कुमारी ने 11 जनवरी को मुख्य सचिव का पदभार ग्रहण किया था और आधिकारिक रूप से राजभवन नहीं जाने पर राज्यपाल ने उनकी खिंचाई की थी।
हालांकि, बीआरएस नेताओं ने जवाबी हमला किया और राज्यपाल को याद दिलाया कि मुख्य सचिव ने पद संभालने के बाद दो बार राजभवन का दौरा किया।
राज्य सरकार ने राज्यपाल के इस तर्क का भी खंडन किया कि उसने विधेयकों पर उनके संदेह को स्पष्ट नहीं किया। इसने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि शिक्षा मंत्री पी. सबिता इंद्रा रेड्डी ने 10 नवंबर, 2022 को राज्यपाल से मुलाकात की थी और राज्यपाल को विधेयकों को पेश करने की आवश्यकता से अवगत कराया गया था और तात्कालिकता के बारे में बताया गया था।
30 जनवरी को, विधायी मामलों के मंत्री एस. प्रशांत रेड्डी ने राज्यपाल से मुलाकात की थी और विधेयकों को स्वीकृति देने पर विचार करने का अनुरोध किया था क्योंकि देरी विधेयकों के मूल उद्देश्य को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाता है।
पिछले साल नवंबर में, राज्यपाल ने बीआरएस द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया था कि उनका कार्यालय राज्य सरकार द्वारा उनकी सहमति के लिए भेजे गए कुछ विधेयकों पर बैठा हुआ है। उन्होंने कहा था कि वह अपनी सहमति देने से पहले विधेयकों का आकलन और विश्लेषण करने में समय ले रही हैं।
बीआरएस अब सुप्रीम कोर्ट से राहत की उम्मीद कर रही है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि सत्तारूढ़ दल लंबित बिलों को मंजूरी देने में देरी से राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर सकता है।
सत्ता पक्ष के नेता राज्यपाल पर 'भाजपा नेता की तरह काम करने' को लेकर निशाना साध रहे हैं। बीआरएस राज्यपाल के कार्यों को केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा तेलंगाना के विकास के मार्ग में बाधा उत्पन्न करने के प्रयासों के रूप में देखता है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद, बीआरएस द्वारा इस साल के अंत में होने वाले चुनावों से पहले इस मुद्दे को जनता के सामने ले जाकर राजनीतिक रूप से भुनाने की संभावना है।
Tagsसुप्रीम कोर्टतेलंगाना सरकारतेलंगानातेलंगाना न्यूज़तेलंगाना राज्यपालSupreme CourtGovernment of TelanganaTelanganaTelangana NewsTelangana Governor
jantaserishta.com
भारत के भले ही किसी कोने में आप रह रहे हों, जनता से रिश्ता वेबसाइट पर आपके राज्य की हर छोटी-बड़ी खबर मिलेगी। राजनीति, खेल, चुनाव, बिजनेस, सिनेमा, इस प्लैटफॉर्म पर बस एक क्लिक करते ही हमेशा पाएं ताजा खबरें। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल समेत देश के बाकी राज्यों और शहरों की कोई जानकारी हो, हम आपको देते हैं। सियासी रण हो या बजट का मौसम, कहां चल रहा क्या सियासी दांव-पेच, आपके गांव में किसकी सरकार, हर अपडेट यहां आपको मिलेंगे। तो फिर अपने राज्य की हर हलचल के लिए जुड़े रहिए जनता से रिश्ता के साथ।
Next Story





