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तेज प्रताप यादव और रवि किशन की मुलाकात से गरमाई बिहार की सियासत

Shantanu Roy
7 Nov 2025 8:38 PM IST
तेज प्रताप यादव और रवि किशन की मुलाकात से गरमाई बिहार की सियासत
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Patna. पटना। बिहार की सियासी फिज़ा में एक बार फिर नई हलचल मच गई है। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव की भाजपा सांसद एवं भोजपुरी स्टार रवि किशन से हुई मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर तेज कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषक इस मुलाकात को आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले एक नए समीकरण के संकेत के तौर पर देख रहे हैं। जानकारी के अनुसार, यह मुलाकात एक निजी कार्यक्रम के बहाने हुई थी। हालांकि, जिस तरह दोनों नेताओं ने
मुलाकात
के बाद एक-दूसरे के प्रति सम्मान और सौहार्द का भाव दिखाया, उससे राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। तेज प्रताप यादव हाल के दिनों में अपने बयानों और कदमों से कई बार पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाते नज़र आए हैं। ऐसे में भाजपा सांसद रवि किशन के साथ उनकी यह मुलाकात महज संयोग नहीं बल्कि सियासी संकेत के तौर पर देखी जा रही है। तेज प्रताप यादव पहले भी कई बार आरजेडी नेतृत्व के फैसलों से असहमति जताते रहे हैं।
उन्होंने एक अवसर पर कहा था कि वे "अपने मन की राजनीति" करते हैं, और किसी के दबाव में नहीं रहते। पार्टी के भीतर उनकी कार्यशैली को लेकर मतभेद की बातें पहले भी उठ चुकी हैं। वहीं, भाजपा के रणनीतिकारों की नज़र लंबे समय से यादव वोट बैंक पर है। अगर तेज प्रताप जैसा चेहरा भाजपा के साथ आता है, तो यह पार्टी के लिए न केवल प्रतीकात्मक बल्कि सामाजिक समीकरण के लिहाज से भी बड़ा फायदा साबित हो सकता है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि भाजपा बिहार में 2025 विधानसभा चुनाव से पहले यादव और मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश में जुटी है। पार्टी की रणनीति साफ है— जातिगत समीकरणों से आगे बढ़कर ‘सबका साथ, सबका विकास’ के एजेंडे को सामाजिक समूहों तक पहुंचाना।

रवि किशन की लोकप्रियता और तेज प्रताप की राजनीतिक पहचान को जोड़कर देखा जाए तो यह मुलाकात भाजपा की उस रणनीति का हिस्सा हो सकती है, जिसमें वह युवा और क्षेत्रीय नेताओं को अपने पाले में लाने की कवायद कर रही है। आरजेडी खेमे में इस मुलाकात को लेकर बेचैनी साफ झलक रही है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि “तेज प्रताप जी का भाजपा नेताओं से मिलना व्यक्तिगत हो सकता है, लेकिन समय कुछ ठीक नहीं चुना गया। विपक्ष को बैठे-बैठे मुद्दा मिल गया।” वहीं, भाजपा नेता इस पर औपचारिक तौर पर भले कुछ न कह रहे हों, लेकिन अंदरखाने में इस पर उत्साह जरूर देखा जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि तेज प्रताप यादव हाल ही में भगवान कृष्ण के भक्त के रूप में अपनी धार्मिक छवि को भी लगातार उभार रहे हैं। दूसरी ओर, भाजपा भी हिंदुत्व और सांस्कृतिक पहचान को केंद्र में रखकर अपनी राजनीति को मजबूती दे रही है। ऐसे में दोनों के बीच वैचारिक समानता के कुछ बिंदु दिखने लगे हैं।
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