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Delhi दिल्ली: टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत के खिलाफ खेलने से पाकिस्तान के इनकार ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। पाकिस्तान के इस फैसले का असर अब उसके लिए भारी पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) इस पूरे मामले पर गंभीरता से विचार कर रही है और सूत्रों के अनुसार मंगलवार या बुधवार को आईसीसी बोर्ड की एक अहम बैठक बुलाई जा सकती है, जिसमें आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।
‘आज तक’ से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, आईसीसी बोर्ड पाकिस्तान के रुख, उसके संभावित प्रभाव और टूर्नामेंट की व्यावसायिक तथा खेल संबंधी विश्वसनीयता पर पड़ने वाले असर को लेकर चर्चा करेगा। हालांकि पाकिस्तान सरकार ने रविवार को सोशल मीडिया के जरिए यह ऐलान कर दिया था कि राष्ट्रीय टीम भारत के खिलाफ नहीं खेलेगी, लेकिन आईसीसी सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) की ओर से अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पत्र या लिखित सूचना नहीं दी गई है।
सरकारी फैसले के सार्वजनिक होने के कुछ घंटों बाद पाकिस्तान के कप्तान सलमान अली आगा ने बयान देते हुए कहा कि सीनियर राष्ट्रीय टीम सरकार के फैसले का पालन करेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह मामला क्रिकेट बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। वहीं, पीसीबी अध्यक्ष और पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नक़वी ने इस पूरे मामले पर अब तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। गौरतलब है कि इससे पहले नक़वी पूरे टूर्नामेंट के बहिष्कार की बात कर चुके थे, जो बाद में केवल भारत के खिलाफ मैच न खेलने तक सीमित रह गई।
सूत्रों का कहना है कि अगर पाकिस्तान 15 फरवरी को निर्धारित भारत-पाकिस्तान मुकाबले में मैदान पर नहीं उतरता है, तो उसे मैच के लिए वॉकओवर देना होगा। इसका सीधा असर अंक तालिका पर पड़ेगा, जहां पाकिस्तान को दो अहम अंक गंवाने होंगे और उसका नेट रन रेट भी बुरी तरह प्रभावित होगा। लेकिन असली संकट मैदान के बाहर संभावित आईसीसी प्रतिबंधों को लेकर है।
आईसीसी के भीतर इस बात पर विचार किया जा रहा है कि पाकिस्तान के इस कदम से क्रिकेट की वैश्विक साख और व्यावसायिक हितों को भारी नुकसान हो सकता है। ऐसे में पाकिस्तान क्रिकेट पर कड़े प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। संभावित प्रतिबंधों में पाकिस्तान सुपर लीग (पीएसएल) में विदेशी खिलाड़ियों की भागीदारी पर रोक, लीग की अंतरराष्ट्रीय मान्यता और व्यावसायिक समर्थन वापस लेना शामिल है। इसके अलावा आईसीसी के राजस्व पूल से पाकिस्तान को मिलने वाली राशि में बड़ी कटौती भी की जा सकती है, जिस पर पीसीबी की आर्थिक निर्भरता काफी हद तक बनी हुई है।
इसके साथ ही भारत-पाकिस्तान मैच नहीं होने से ब्रॉडकास्टर्स को हुए संभावित राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए पाकिस्तान को मुआवजा देने का निर्देश भी दिया जा सकता है। एशिया कप से पाकिस्तान को बाहर करने और सभी द्विपक्षीय सीरीज पर रोक जैसे कठोर कदमों पर भी चर्चा संभव है।
भारत-पाकिस्तान मुकाबला विश्व क्रिकेट के सबसे अधिक देखे जाने वाले मैचों में से एक माना जाता है। पिछले साल एशिया कप में दोनों टीमों के बीच एक महीने के भीतर तीन मुकाबले हुए थे, जिससे ब्रॉडकास्टर्स को अरबों रुपये की कमाई हुई थी। ऐसे में इस मैच के न होने से ब्रॉडकास्टर्स का दबाव भी आईसीसी पर बढ़ सकता है। आईसीसी ने एक आधिकारिक बयान में पाकिस्तान को संभावित परिणामों के प्रति आगाह करते हुए पीसीबी से अपील की है कि वह अंतिम फैसला लेने से पहले इसके दीर्घकालिक प्रभावों पर गंभीरता से विचार करे।
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