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Delhi दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार को स्विस परिसंघ के राष्ट्रपति गाइ पारमेलिन का राष्ट्रपति भवन में स्वागत किया और उनके सम्मान में राजकीय भोज का आयोजन किया। पारमेलिन भारत की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर नई दिल्ली पहुंचे हैं। इससे पहले राष्ट्रपति भवन में उनका औपचारिक स्वागत किया गया, जहां राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद रहे। राष्ट्रपति मुर्मु और स्विस राष्ट्रपति पारमेलिन के बीच हुई बातचीत में भारत और स्विट्जरलैंड के द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया गया। दोनों नेताओं ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, इनोवेशन तथा स्वच्छ और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की।
दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि इन क्षेत्रों में भारत और स्विट्जरलैंड के बीच नजदीकी सहयोग दोनों देशों के लोगों के लिए व्यापक लाभ लेकर आ सकता है। तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था और नई तकनीकों के दौर में विज्ञान, अनुसंधान और इनोवेशन में साझेदारी को दोनों देशों के संबंधों का महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जा रहा है। स्वच्छ और हरित ऊर्जा पर सहयोग भी बातचीत के प्रमुख विषयों में शामिल रहा। ऊर्जा परिवर्तन और पर्यावरण अनुकूल तकनीकों के बढ़ते महत्व के बीच दोनों देशों के लिए इस क्षेत्र में मिलकर काम करने की संभावनाओं पर जोर दिया गया।
पारमेलिन की भारत यात्रा के दौरान व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, इनोवेशन और मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। उनके औपचारिक स्वागत के साथ दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय बातचीत का दौर शुरू हुआ। राष्ट्रपति भवन पहुंचने पर स्विस राष्ट्रपति को औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका स्वागत किया।
भारत और स्विट्जरलैंड के बीच आर्थिक, तकनीकी और नवाचार आधारित सहयोग के कई क्षेत्र हैं। मौजूदा यात्रा के दौरान इन संबंधों को और विस्तार देने तथा नई संभावनाओं की पहचान करने पर जोर दिया जा रहा है। राष्ट्रपति मुर्मु द्वारा आयोजित राजकीय भोज दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय राजनयिक संपर्क का हिस्सा रहा। इस दौरान दोनों पक्षों ने आपसी सहयोग को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
राष्ट्रपति पारमेलिन की यात्रा को भारत और स्विट्जरलैंड के बीच संबंधों को नई गति देने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है। विशेष रूप से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, इनोवेशन और हरित ऊर्जा में सहयोग बढ़ाने पर दोनों देशों का फोकस रहेगा।
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