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जिला जेल में बंदी की संदिग्ध मौत, परिवार ने लगाया हत्या का आरोप

Shantanu Roy
14 Aug 2025 4:11 PM IST
जिला जेल में बंदी की संदिग्ध मौत, परिवार ने लगाया हत्या का आरोप
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प्रशासन ने बताया हादसा
Moradabad. मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में बुधवार शाम जिला जेल में बंद एक बंदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतक की पहचान आसे उर्फ आशाराम के रूप में हुई है, जो करीब दो महीने पहले पुलिस मुठभेड़ में गोली लगने के बाद गिरफ्तार हुआ था। जेल प्रशासन का दावा है कि बंदी शौचालय में गिरने से घायल हुआ और बाद में उसकी मौत हो गई, जबकि परिवार ने जेल में हत्या का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
मुठभेड़ में पकड़ा गया था आरोपी
जानकारी के अनुसार, रामपुर जिले के सैफनी थाना क्षेत्र के चौकोनी गांव निवासी आशे उर्फ आशाराम को बिलारी पुलिस ने करीब दो महीने पहले एक पुलिस मुठभेड़ के दौरान पैर में गोली मारकर गिरफ्तार किया था। उस समय वह हत्या का प्रयास, धोखाधड़ी, जालसाजी, अपहरण और पाॅक्सो एक्ट जैसे गंभीर मामलों में वांछित था। गिरफ्तारी के बाद से वह मुरादाबाद जिला जेल में बंद था।
जेल प्रशासन का बयान
जेल अधीक्षक आलोक सिंह ने बताया कि आशाराम के पैर में गोली लगने के कारण वह छड़ी के सहारे चलता था। बुधवार शाम करीब चार बजे वह जेल के शौचालय में गया, जहां अचानक गिर पड़ा। अन्य बंदियों ने उसे बेहोशी की हालत में देखा और तुरंत शोर मचाया। जेल कर्मचारियों ने उसे तुरंत जेल अस्पताल में भर्ती कराया, जहां से हालत गंभीर होने पर जिला अस्पताल भेजा गया। चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
परिवार का आरोप – हत्या की साजिश
मृतक के भाई दान सिंह का आरोप है कि यह साधारण हादसा नहीं, बल्कि जेल के अंदर हत्या का मामला है। उनका दावा है कि मंगलवार को ही जेल में आशाराम के साथ मारपीट की गई थी। उन्होंने कहा कि उनके भाई को पहले से ही परेशान किया जा रहा था और जेल प्रशासन इस सच्चाई को छुपाने की कोशिश कर रहा है। दान सिंह ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
पुलिस की प्रतिक्रिया
घटना की जानकारी मिलने के बाद सिविल लाइंस थाना पुलिस जिला अस्पताल पहुंची और मामले की छानबीन शुरू की। एसपी सिटी कुमार रण विजय सिंह ने बताया कि बंदी की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए पोस्टमॉर्टम कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच में हत्या जैसी कोई बात सामने नहीं आई है।
बंदी की बीमारी का इतिहास
पुलिस और जेल प्रशासन के अनुसार, आशाराम लंबे समय से बीमार चल रहा था। करीब 15 दिन पहले उसका इलाज मेरठ मेडिकल कॉलेज में भी कराया गया था। प्रशासन का कहना है कि उसकी मौत स्वाभाविक कारणों से हुई है और इसमें किसी प्रकार की मारपीट या साजिश का सबूत अभी तक नहीं मिला है।
तनाव का माहौल, जांच की मांग
घटना के बाद जेल परिसर और जिला अस्पताल में तनाव का माहौल बन गया। मृतक के परिजन और कुछ समर्थक मौके पर जमा हो गए। उन्होंने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सीबीआई या न्यायिक जांच की मांग की। पुलिस बल ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जिला अस्पताल और जेल दोनों जगह सुरक्षा बढ़ा दी है।
मौत के बाद उठे सवाल
इस घटना ने जेलों में बंद कैदियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का आरोप है कि आशाराम को समय पर और उचित इलाज नहीं दिया गया, जिससे उसकी मौत हुई। वहीं, प्रशासन का कहना है कि उसे हर संभव चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई थी। पुलिस ने मृतक का शव पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी। साथ ही, मामले की जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों ने मैजिस्ट्रेट जांच के संकेत दिए हैं, ताकि मौत के पीछे की सच्चाई सामने आ सके।
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