भारत
स्टैंड-अप कॉमेडियन्स को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, सरकार को गाइडलाइन बनाने का आदेश
jantaserishta.com
25 Aug 2025 12:59 PM IST

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कहा- कमाई के लिए दूसरों का नहीं उड़ा सकते मजाक.
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया और YouTube इन्फ्लुएंसर्स पर सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर कमाई करने वाले इन्फ्लुएंसर्स का कंटेंट फ्री स्पीच की कैटेगरी में नहीं आता. इसे कॉमर्शियल स्पीच माना जाएगा. कोर्ट ने साथ ही स्टैंड-अप कॉमेडियन्स को बिना शर्त माफी मांगने को कहा है. समय रैना के शो में रणवीर इलाहाबादिया की टिप्पणी के बाद विवाद शुरू हुआ था.
यह मामला तब सामने आया जब स्टैंड-अप कॉमेडियन समय रैना, विपुल गोयल, बलराज परमारजीत सिंह घई, निशांत जगदीश तंवर और सोनाली ठक्कर उर्फ सोनाली आदित्य देसाई पर दिव्यांगजनों को लेकर असंवेदनशील टिप्पणियां करने के आरोप लगे. सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी कॉमेडियन्स को अपने YouTube चैनल और पॉडकास्ट पर दिव्यांगजनों से बिना शर्त माफी मांगने का निर्देश दिया है.
सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही रणवीर इलाहाबादिया को भी बिना शर्त माफी मांगने को कहा है. उन्होंने समय रैना के ही शो में माता-पिता पर कथित रूप से भद्दी टिप्पणियां की थी. इसको लेकर सोशल मीडिया पर बड़ी बहस छिड़ गई थी और उन्हें चौतरफा आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था. बाद में समय रैना को अपना शो "India's Got Latent" बंद करना पड़ा था.
कोर्ट ने कहा कि स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) से जूझ रहे बच्चों के परिवारों ने जो कदम उठाया है, वह बेहद साहसिक है. उन्होंने कॉमेडियन समय रैना की टिप्पणी पर आपत्ति जताई थी और इसे बच्चों का अपमान बताया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन्फ्लुएंसर्स और कॉमेडियन्स को न सिर्फ़ सार्वजनिक माफी मांगनी होगी बल्कि एक शपथपत्र भी देना होगा जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि वे अपने सोशल मीडिया प्रभाव का इस्तेमाल दिव्यांगजनों के अधिकारों के बारे में जागरूकता फैलाने में कैसे करेंगे.
कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसे मामलों में इन इन्फ्लुएंसर्स पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है. साथ ही सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (I&B Ministry) को निर्देश दिया गया है कि वह सोशल मीडिया पर इस्तेमाल होने वाली भाषा को लेकर स्पष्ट गाइडलाइन्स तैयार करे. कोर्ट ने कहा कि यह गाइडलाइन्स किसी एक घटना पर जल्दबाज़ी में न बने, बल्कि तकनीक और सोशल मीडिया से जुड़े व्यापक मुद्दों को ध्यान में रखकर बनाई जाएं.
इसके लिए मंत्रालय को NBDSA और अन्य स्टेकहोल्डर्स से सलाह-मशविरा करने को कहा गया है. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब कॉमेडियन्स को हर सुनवाई में व्यक्तिगत तौर पर पेश होने की जरूरत नहीं होगी. वहीं, इन इन्फ्लुएंसर्स पर उपयुक्त पेनल्टी लगाने का निर्णय बाद में लिया जाएगा.
Tagsसुप्रीम कोर्टYouTube इन्फ्लुएंसर्ससोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्सSupreme CourtYouTube influencersSocial media platforms
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