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Punjab पंजाब: पराली जलाने की समस्या पर नियंत्रण को लेकर प्रशासन को बड़ी सफलता मिली है। जिले में इस साल पराली जलाने के मामलों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। मोगा के उप मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) सारंगप्रीत सिंह ने मंगलवार को जानकारी दी कि अब तक जिले में कुल 15 पराली जलाने के मामले सामने आए हैं, जबकि इसी तारीख तक पिछले वर्ष (2023) 136 मामले दर्ज हुए थे। एसडीएम ने इसे एक “बड़ी प्रशासनिक उपलब्धि” बताते हुए कहा कि यह कमी किसानों में बढ़ती जागरूकता और अधिकारियों की सख्त निगरानी का परिणाम है। उन्होंने कहा, “इस साल पराली जलाने के मामलों में 90% से अधिक की गिरावट आई है। हमने हर शिकायत पर तत्काल कार्रवाई की है। जिन जगहों पर आग लगने की घटनाएं पाई गईं, वहां एफआईआर, चालान और रेड एंट्री की कानूनी प्रक्रिया अगले ही दिन पूरी की गई।”
सारंगप्रीत सिंह ने कहा कि प्रशासन लगातार फील्ड स्तर पर निगरानी कर रहा है ताकि पराली जलाने की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके। उन्होंने बताया कि सभी कृषि विकास अधिकारियों, पटवारियों और ब्लॉक स्तर के कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे किसानों से सीधे संवाद करें और उन्हें वैकल्पिक उपाय अपनाने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा, “कई किसानों ने इस साल पराली न जलाने का संकल्प लिया है। उन्हें सरकार की तरफ से सब्सिडी पर उपलब्ध कराई गई हैप्पी सीडर, सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (SMS) जैसी मशीनें दी गई हैं, जिनसे पराली को खेत में ही मिट्टी में मिलाया जा सकता है। यही कारण है कि जिले में जलाने की घटनाओं में भारी गिरावट आई है।”
एसडीएम ने बताया कि जिले के विभिन्न ब्लॉकों में निगरानी टीमें बनाई गई हैं, जो ड्रोन और सैटेलाइट इमेज के जरिए खेतों पर नजर रख रही हैं। “जहां भी धुआं या जलने के निशान दिखते हैं, वहां तुरंत टीम भेजी जाती है। यह निगरानी प्रक्रिया दिन-रात जारी रहती है,” उन्होंने कहा। सारंगप्रीत सिंह ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि वे पराली जलाने की प्रथा को पूरी तरह समाप्त करें। “यह न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डालता है। पंजाब सरकार किसानों के साथ है, हम उन्हें तकनीकी और वित्तीय सहायता देने के लिए तत्पर हैं,” उन्होंने जोड़ा।
प्रशासन ने यह भी बताया कि जिन किसानों ने पराली न जलाने का वचन निभाया है, उन्हें सम्मानित करने की योजना बनाई जा रही है, ताकि अन्य किसानों को भी प्रेरणा मिले। पंजाब में पराली जलाने की समस्या हर साल वायु प्रदूषण का बड़ा कारण बनती है, विशेषकर दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में इसका असर देखा जाता है। मोगा प्रशासन के इस प्रयास से उम्मीद है कि आने वाले समय में पूरे राज्य में ऐसे मामलों में उल्लेखनीय कमी आएगी।
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