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विपक्ष का जोरदार हमला: CEC ज्ञानेंद्र कुमार को हटाने के लिए पास किया प्रस्ताव
Tara Tandi
1 Nov 2026 11:54 AM IST

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नई दिल्ली: शनिवार को विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और नागरिक समाज के सदस्यों ने सर्वसम्मति से एक 'प्रतीकात्मक सार्वजनिक महाभियोग' प्रस्ताव पारित किया। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने और चुनावी अनियमितताओं तथा वोट चोरी के आरोपों के चलते उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की मांग की गई।
यह कार्यक्रम कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के आधिकारिक आवास, 10 राजाजी मार्ग पर आयोजित किया गया था।
लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार ने इस कार्यवाही की अध्यक्षता की।
इस कार्यक्रम में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और के.सी. वेणुगोपाल के साथ-साथ झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी, समाजवादी पार्टी के नेता धर्मेंद्र यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव और विपक्ष के 250 से अधिक सांसद तथा अन्य लोग शामिल हुए।
प्रस्ताव पेश करते हुए, खड़गे ने चुनाव आयोग पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पक्ष में मतदाता सूची और चुनाव परिणामों में हेरफेर करने का आरोप लगाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) प्रक्रिया के कारण 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए। उन्होंने आयोग पर मतदाता सूची पर अपना नियंत्रण केंद्रित करने और अन्य चुनाव आयुक्तों को महत्वपूर्ण निर्णय लेने की प्रक्रियाओं से बाहर रखने का भी आरोप लगाया।
खड़गे ने दावा किया कि नागरिकों के संवैधानिक मतदान अधिकार पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों पर काम कर रहे हैं।
उन्होंने SIR प्रक्रिया को तुरंत रोकने की भी मांग की।
राहुल गांधी ने सभा को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि 13.2 करोड़ नाम हटाने का मतलब है कि कुल मतदाताओं में से लगभग 15 प्रतिशत को हटा दिया गया है।
उन्होंने कहा कि इससे 2024 के लोकसभा चुनावों की वैधता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं, जिसमें विपक्ष और सत्ताधारी दलों के बीच का अंतर लगभग तीन प्रतिशत था।
राहुल गांधी ने यह भी मांग की कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू की जाए, जिसमें देशद्रोह का मामला भी शामिल हो। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष के पास चुनावी गड़बड़ी के पर्याप्त सबूत मौजूद हैं।
इस प्रस्ताव में 2023 के उस कानून को रद्द करने की भी मांग की गई, जो मुख्य चुनाव आयुक्त को कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है। विपक्ष के नेताओं ने कहा कि वे संसद और जन-लामबंदी के ज़रिए अपना अभियान जारी रखेंगे।
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