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Solan. सोलन। देश में शहद उत्पादन को बढ़ावा देने, उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने और मधुमक्खी पालन को वैज्ञानिक अनुसंधान से जोडऩे की दिशा में सोलन स्थित डा. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में प्रदेश का पहला मधु विज्ञान सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा। यह केंद्र प्रदेश के किसानों और बागबानों के लिए नई संभावनाएं खोलने के साथ देश में मधुमक्खी पालन के क्षेत्र को मजबूत करने में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। केंद्र में मधुमक्खी पालन की आधुनिक तकनीकों, मधुमक्खियों के लिए उपयोगी पुष्पों और शहद की गुणवत्ता पर विशेष शोध किया जाएगा। इसके लिए आधुनिक प्रयोगशाला स्थापित करने की योजना है, जहां शहद की शुद्धता और गुणवत्ता की जांच की जा सकेगी।
इससे शहद उत्पादकों को अपने उत्पाद की गुणवत्ता प्रमाणित करवाने और बाजार में बेहतर पहचान हासिल करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इस केंद्र में शहद के अलावा मधुमक्खी के विष, रॉयल जेली, प्रोपोलिस और बी-पोलन जैसे उत्पादों के पोषण एवं औषधीय गुणों पर भी वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा। नौणी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एचएस बवेजा के अनुसार, यह केंद्र शहद और मधुमक्खी के अन्य उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने के साथ एपीथैरेपी के क्षेत्र में नए शोध अवसर उपलब्ध करवाने में महत्त्वपूर्ण साबित होगा।
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