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Delhi दिल्ली। ‘When Audit Matters: CAG Interventions That Made a Difference’ पुस्तक के लॉन्च कार्यक्रम में रूपा पब्लिकेशंस के मैनेजिंग डायरेक्टर Kapish Mehra ने पुस्तक को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पुस्तक के कुछ हिस्सों को देखने के बाद इसमें शामिल योगदानकर्ताओं का काम सराहनीय है, लेकिन यह सवाल भी उठता है कि क्या यह किताब पहले लिखी जा सकती थी। उनके अनुसार, अगर यह पुस्तक पहले आती तो शायद इसे अधिक समाचार योग्य माना जाता।
कपिश मेहरा ने पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) Vinod Rai का उल्लेख करते हुए कहा कि वे हमेशा समाचारों की सुर्खियों से दूर रहने की कोशिश करते हैं, जबकि प्रकाशक अक्सर किसी भी प्रकाशन को अधिक ‘न्यूज़वर्थी’ बनाने पर जोर देते हैं। कार्यक्रम में इस पुस्तक को सार्वजनिक प्रशासन और ऑडिटिंग से जुड़े महत्वपूर्ण हस्तक्षेपों को समझने का एक प्रयास बताया गया। इसमें बताया गया है कि कैसे CAG की रिपोर्टों ने विभिन्न नीतिगत और प्रशासनिक फैसलों को प्रभावित किया।
इस मौके पर वक्ताओं ने पारदर्शिता, जवाबदेही और ऑडिट संस्थाओं की भूमिका पर भी चर्चा की। पुस्तक लॉन्च के दौरान उपस्थित लोगों ने इसे भारत की प्रशासनिक व्यवस्था और वित्तीय निगरानी प्रणाली को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया।
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