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Shimla. शिमला। हिमाचल प्रदेश के शिमला जिला के कोटगढ़ क्षेत्र में इस साल खुमानी की नई विदेशी किस्म बोर्सालिनो की पहली फसल तैयार होने जा रही है। प्रगतिशील बागबान दीपक सिंघा ने अपने बागीचे में इस किस्म के पौधे लगाए हैं, जिन्हें उन्होंने स्पेन की कंपनी पीएसबी स्पेन से मंगवाया था। बोर्सालिनो खुमानी अप्रैल के अंत तक तुड़ाई के लिए तैयार हो जाएगी और इसकी पहली खेप मई में प्रदेश की मंडियों में पहुंच जाएगी।
बाजार में इस खुमानी की कीमत लगभग 250 से 300 रुपए प्रति किलोग्राम मिलने की संभावना है। बोर्सालिनो स्पेन में विकसित की गई खुमानी की नई किस्म है, और इसका ब्रीडिंग प्रोग्राम भी पीएसबी स्पेन द्वारा तैयार किया गया। यह किस्म समुद्र तल से करीब साढ़े पांच हजार फीट की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बेहतर उत्पादन देती है। अप्रैल के अंतिम सप्ताह में हार्वेस्टिंग शुरू होने की संभावना है। इस समय बाजार में अन्य स्टोन फ्रूट कम उपलब्ध होते हैं, जिससे बागबानों को बेहतर दाम मिलने की उम्मीद रहती है। बोर्सालिनो की खासियत इसकी कम इनपुट लागत है। सेब की खेती के मुकाबले इस खुमानी की फसल में केवल पांच प्रतिशत से भी कम लागत आती है, इसलिए इसे लगभग जीरो इनपुट कॉस्ट वाली फसल माना जा रहा है। इसके कारण बागबान कम खर्च में अधिक आय अर्जित कर सकते हैं।
बागबानी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस किस्म का उत्पादन सफल रहता है, तो हिमाचल के निचले और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में खुमानी की खेती किसानों और बागबानों के लिए आय का नया विकल्प बन सकती है। इस किस्म के लिए ब्रांडिंग प्रोग्राम भी पीएसबी स्पेन ने विकसित किया है, जिससे इसके विपणन और पहचान में आसानी होगी। दीपक सिंघा ने बताया कि उन्होंने बोर्सालिनो की बागबानी में विशेष ध्यान दिया है ताकि पौधों की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता अधिकतम बनी रहे। उन्होंने कहा कि इस नई किस्म से बागबान बेहतर लाभ कमा सकते हैं और कृषि आय को बढ़ाने में मदद मिलेगी। बोर्सालिनो की खेती से बागबानों को पारंपरिक फसलों की तुलना में अधिक लाभ मिलेगा, क्योंकि इसकी लागत कम और बाजार में मांग अधिक है।
हिमाचल प्रदेश में इस प्रकार की विदेशी किस्मों का प्रयोग नए कृषि विकल्प और आय के स्रोत खोल सकता है। बागबानों को सलाह दी गई है कि वे इस किस्म की पैदावार और बिक्री के लिए पहले से योजना बनाएं, ताकि जब फसल बाजार में आए, तो उन्हें उच्चतम मूल्य मिल सके। इसके साथ ही राज्य कृषि विभाग और बागबानी विशेषज्ञ भी किसानों और बागबानों को तकनीकी सहायता प्रदान कर रहे हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन सुनिश्चित किया जा सके। इस वर्ष कोटगढ़ में बोर्सालिनो की पहली फसल सफल रही तो यह हिमाचल प्रदेश में खुमानी की खेती में नई क्रांति ला सकती है। बागबानों के लिए यह नई किस्म लाभकारी होने के साथ-साथ कृषि में विविधता और स्थिर आय का अवसर भी प्रदान करेगी।
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