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एशिया का सबसे बड़ा रेड लाइट एरिया सोनागाछी, सेक्स वर्करों में SIR से बढ़ी चिंता

jantaserishta.com
27 Nov 2025 9:58 AM IST
एशिया का सबसे बड़ा रेड लाइट एरिया सोनागाछी, सेक्स वर्करों में SIR से बढ़ी चिंता
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जहां सजती है जिस्म की मंडी.
नई दिल्ली: एशिया के सबसे बड़े रेड लाइट एरिया सोनागाछी में सेक्स वर्करों में बैचेनी है. पुराने बक्शे खोले जा रहे हैं. खोलियों में सहेजकर रखे गए तुड़े-मुड़े पुराने कागजों से गर्द-धूल की परतें हटाई जा रही हैं. हर सेक्स वर्कर एक ही कागज की तलाश कर रहा है और वो है अपना पहचान पत्र, पहचान को साबित करने वाले दूसरे दस्तावेज. चुनाव आयोग द्वारा बंगाल चुनाव से पहले शुरू की गई SIR (special intensive revision- विशेष गहन पुनरीक्षण) से सेक्स वर्कर हलकान हुए जा रहे हैं.
10 हजार सेक्स वर्करों के रिहायश सोनागाछी में सेक्स वर्करों के सामने कई मोर्चे पर चुनौतियां और समस्या है. यहां कई लड़कियां, कई महिलाएं ऐसी हैं जिनके न पिता का पता है और न ही घर द्वार का ठिकाना. कई सेक्स वर्कर ऐसी हैं जो कहती हैं कि उनसे जो डॉक्यूमेंट्स दिखाने के लिए कहा जा रहा है, खासकर 2002 के इलेक्टोरल रोल से फैमिली डिटेल्स का प्रूफ वे उनके लिए मौजूद ही नहीं हैं. ऐसे में उनके लिए सारे रास्ते बंद हो जाते हैं.
सोनागाछी में लड़कियां/महिलाएं अलग-अलग परिस्थितियों और रास्तों से पहुंचती हैं. इनमें से ज्यादातर की कहानी दुखभरी हैं. यहां पहुंचने वाली ज्यादातर महिलाएं ट्रैफिकिंग के जरिए पहुंचती हैं, ऐसी स्थिति में उनके पास खुद का या उनके परिवार का कोई दस्तावेज नहीं होता है. SIR के कागज दिखाना इन महिलाओं के लिए असंभव सा हो गया है.
कई महिलाएं या लड़कियां घर से भागकर देह व्यापार के इस दलदल में पहुंचती हैं. ऐसे में उनके पास अपनी जानकारी तो होती है लेकिन चुनाव आयोग द्वारा 2002 के वोटर लिस्ट से अपने माता-पिता का डिटेल निकालना इनके लिए नामुमकिन सा है.
सोनागाछी में कई लड़कियां घर से भागकर पहुंचती हैं. इन्हें अपने परिवार की जानकारी भी है. लेकिन वे सामाजिक दबाव में अपने परिवार से संपर्क कर 2002 से जुड़ी जानकारी पूछने से हिचकिचाती हैं.
पश्चिम बंगाल में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के तहत वोटर लिस्ट को अपडेट करने की प्रक्रिया में 2002 की वोटर लिस्ट को बेसलाइन या आधार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. यह SIR का आखिरी बड़ा रिवीजन था. मौजूदा वोटर्स को यह साबित करना पड़ रहा है कि उनका नाम, या उनके माता-पिता/रिश्तेदार का नाम, उसी 2002 की लिस्ट में मौजूद था. अगर ऐसा साबित हो जाता है तो फॉर्म भरना आसान हो जाता है और वोटर लिस्ट में नाम आसानी से जुड़ जाता है. वोटर लिस्ट में नाम न जुड़ने पर व्यक्ति के सामने पहचान का संकट खड़ा हो जाता है.
दरबार महिला समन्वय समिति नाम की गैर सरकारी संस्था सोनागाछी में महिलाओं के कल्याण के लिए काम करती है. इस संस्था की सचिव विशाखा लस्कर ने एएनआई से बातचीत में कहा है कि सेक्स वर्करों ने सालों पहले अपने घर से संबंध तोड़ लिया है, घरवाले भी उनसे ताल्लुक नहीं रखते हैं. ऐसी स्थिति में वे कागजात कहां से निकालेंगी.
विशाखा लश्कर ने कहा, "सेक्स वर्कर्स को 2002 में ऑफिशियल वोटर ID कार्ड मिले. उससे पहले उनके पास कोई वोटर ID कार्ड नहीं था. हमने 2002 के बाद अपने वोटिंग राइट्स का इस्तेमाल करना शुरू किया. जाहिर है हमारा नाम 2002 की वोटर लिस्ट में नहीं होगा."
विशाखा लस्कर ने कहा कि अब कई सेक्स वर्कर्स के पास आधार कार्ड, पैन कार्ड, राशन कार्ड वगैरह जैसे ऑफिशियल डॉक्यूमेंट्स हैं. उन्होंने कहा कि हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि इन डॉक्यूमेंट्स के आधार पर उनके नाम SIR में जोड़े जाएं, इससे कम्युनिटी को फायदा होगा.
सेक्स वर्करों की समस्याओं को देखते हुए चुनाव आयोग ने सोनागाछी में स्पेशल कैंप लगाने का फैसला किया है. क्योंकि इनकी समस्याएं भी अलग तरह की हैं.
चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर के ऑफिस के एक सीनियर अधिकारी ने PTI को बताया कि कमीशन ने इन चिंताओं पर ध्यान दिया है, क्योंकि कई ऑर्गनाइज़ेशन ने बताया कि एशिया के सबसे बड़े रेड लाइट डिस्ट्रिक्ट में कई सेक्स वर्कर 2002 के रिकॉर्ड नहीं ढूंढ पा रही हैं, जो SIR प्रोसेस के तहत एक जरूरी शर्त है.
उन्होंने कहा कि कई संगठनों ने कमियों का खुलासा किया है, खासकर उन महिलाओं के लिए जो कभी अपने माता-पिता के साथ नहीं रहीं, जिन्हें छोड़ दिया गया, या जो परिवार के साथ रिश्ते बनाए रखने में नाकाम रहीं.
अधिकारी ने कहा, "हमें रिपोर्ट मिली है कि इन इलाकों की सेक्स वर्कर फॉर्म भर रही हैं, अगर उन्हें किसी मदद की जरूरत पड़ी तो हम मदद करेंगे. हमें पता चला कि उनमें से कई को 2002 की वोटर लिस्ट से कोई लिंक नहीं मिला."
उन्होंने कहा, "9 दिसंबर को ड्राफ्ट रोल आने के बाद जब सुनवाई शुरू होगी, तो हमने उन इलाकों में स्पेशल हियरिंग कैंप लगाने का फैसला किया है ताकि मामलों का वहीं हल हो सके और उन्हें कोई दिक्कत न हो."
अधिकारी ने आगे कहा कि इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर उनके मामलों की सुनवाई के लिए खुद कैंप में आएंगे. सोनागाछी में विशेष कैंप लगाने का फैसला कई संस्थाओं के अनुरोध के बाद किया गया है. इनमें सोसाइटी फॉर ह्यूमन डेवलपमेंट एंड सोशल एक्शन, उषा मल्टीपर्पस कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, और अमरा पदातिक शामिल हैं.
इन संस्थाओं ने कहा कि यहां की सैकड़ों महिलाओं का नाम वोटर लिस्ट से हट सकता है क्योंकि इनके पास 2002 से जुडी कोई जानकारी नहीं है. कई ऑर्गनाइज़ेशन मंगलवार को फिर से CEO से मुलाकात की और इस अपील को दोहराया कि SIR प्रोसीजर में उन महिलाओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए जिनके पास फैमिली हिस्ट्री जानने का कोई तरीका नहीं है.
SIR की प्रक्रिया के बाद पश्चिम बंगाल में 9 दिसंबर को वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट रोल जारी होने वाला है. यानी कि इस दिन पता लग जाएगा कि किसका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है. इसके बाद वोटर लिस्ट से नाम कटने वाले लोग अपनी आपत्तियां दर्ज कर सकेंगे. ये आपत्तियां 8 जनवरी 2026 तक दर्ज कराई जा सकती हैं. इसके बादर 7 फरवरी 2026 पश्चिम बंगाल का फ़ाइनल वोटर लिस्ट जारी होगा.
इससे पहले 9 दिसंबर से 31 जनवरी के बीच दावों पर सुनवाई होगी और वेरिफ़िकेशन होगा. प्रशासन यह पक्का करना चाहता है कि सेक्स वर्करों का नाम वाजिब वजहों से छूट न जाए.
इसलिए सोनागाछी में प्रस्तावित स्पेशल कैंप का मकसद सुनवाई के दौरान मौके पर ही उनके मामलों की जांच करना और असली एप्लीकेशन को बिना देर किए क्लियर करना होगा. पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं.
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