पिता को सुसाइड करने से रोकने दौड़ा बेटा, ट्रेन से कटकर दोनों की मौत

देवरिया के गौरीबाजार के उद्योग नगर वार्ड नं.2 के रहने वाले श्रवण जायसवाल (उम्र 55 वर्ष) रामलक्षन चौराहे पर रेडिमेड की दुकान चलाते थे। उनके दो बेटे श्वेतांक, राकेश थे। उनकी पूजा नाम की एक बेटी भी है। सभी बच्चे रेडीमेड की दुकान पर रहते थे और दुकान को अच्छी तरह से चलाते थे। वह दुकान ही उनके परिवार की जीविका का साधन थी। इस परिवार के लिए यह वर्ष काफी खराब गुजरा। सात मार्च को दुकान से बाइक से घर लौटते समय कटाई के पास सड़क हादसे में बड़े बेटे श्वेतांक ने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। श्वेतांक के चलते ही रेडीमेड का कारोबार अच्छी तरह से चलता था। बड़े बेटे की मौत से कारोबार डगमगाने लगा। बेटे की मौत और आर्थिक दबाव से श्रवण तनाव में रहने लगे। वह श्रवण की याद और गम में पूरी तरह डूब गए थे। श्रवण, रोज की तरह शुक्रवार शाम दुकान बंद कर बाइक से बेटे राकेश (उम्र 26 वर्ष) के साथ से घर पहुंचे थे। चाय-नाश्ता करने के बाद दोनों पिता-पुत्र बाइक से कपड़े की खरीदारी करने के लिए गोरखपुर जिले के चौरीचौरा जाने की बात कहकर घर से निकल गए। देर रात तक दोनों घर नहीं लौटे तो परिवार के लोग चिंतित हो गए कुछ ही देर बाद पुलिस ने परिवार के लोगों को फोन कर बताया कि ट्रैक से दोनों के शव बरामद किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार लखनऊ-बरौनी एक्सप्रेस ट्रेन के ड्राइवर ने जो बताया, वह काफी हैरान करने वाला है। छोटा बेटा पिता को समझाने का प्रयास करता, लेकिन वह मानने को तैयार नहीं थे, वह रेलवे ट्रैक पर बैठे हुए थे। उधर, ड्राइवर लगातार हार्न बजाते हुए पिता-पुत्र से हटने के लिए इशारा करता रहा। लेकिन दोनों में से कोई पटरी से हट नहीं रहा था। पिता जिद ठानकर बैठे हुए थे जबकि बेटा उन्हें पटरी से खींचकर हटाने की कोशिश कर रहा था। उसने अंतिम समय तक अपनी कोशिश जारी रखी। पिता को बचाने की जद्दोजहद में अंतत: वह भी ट्रेन की चपेट में आ गया। दोनों ने एक साथ इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया।





