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समाजसेवी की मौत, लगी थी नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन, मेडिकल संचालक के खिलाफ एफआईआर

jantaserishta.com
10 Jun 2021 7:38 AM GMT
समाजसेवी की मौत, लगी थी नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन, मेडिकल संचालक के खिलाफ एफआईआर
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जांच में पता चला इंजेक्शन नकली है.

बरेली. कोरोना की दूसरी लहर में कई दवा व्यापारियों ने आपदा को अवसर के तौर पर लिया. व्यापारियों ने दवाइयों को ऊंची कीमतों पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाया. वहीं कई लोगों ने पैसों के लिए नकली इंजेक्शन को बेचकर लोगों की जान के साथ खिलवाड़ करने से भी गुरेज नहीं किया. ऐसा ही एक मामला बरेली में सामने आया है. एक बड़े समाजसेवी को जब कोरोना हुआ तो उन्हें मेडिकल शॉप से रेमडेसिविर इंजेक्शन 90 हजार में मिला. इंजेक्शन लगाने के कुछ देर बाद ही समाजसेवी की मौत हो गई. जांच में पता चला इंजेक्शन नकली है. अब आरोपी मेडिकल संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है.

नकली इंजेक्शन से मौत का मामला बीते महीने का है. फतेहगंज पश्चिमी के प्रमुख कारोबारी एवं वर‍िष्‍ठ समाजसेवी मनोज अग्रवाल उर्फ पम्मी लाला को प‍िछले महीने कोरोना हुआ था. पर‍िवार ने उनको बरेली के निजी अस्पताल में भर्ती कराया था. उनका ऑक्सीजन लेवल लगातार गिर रहा था और सांस लेने में तकलीफ थी. साथ ही इन्फेक्शन बढ़ता जा रहा था. डॉक्टरों ने उन्हें रेमडेसिविर इंजेक्शन की जरूरत बताई थी.
डॉक्टर की सलाह पर पम्‍मी लाला के बेटे तुषार और संसार अग्रवाल ने मेडिकल शॉप से 90 हजार रुपये में रेमडेसिविर इंजेक्शन खरीदे और उन्हें अपने पिताजी को लगवा दिया. इंजेक्शन लगने के बाद परिजनों को आस थी कि वह ठीक हो जाएंगे, उनकी हालत और बिगड़नी शुरू हो गई. परिजन उन्हें दिल्ली के बड़े अस्पताल में लेकर गए, लेकिन वहां उपचार के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका और 12 मई को उनका निधन हो गया.
उस समय परिजनों ने उनका अंतिम संस्कार कर दिया. पम्‍मी लाला के बेटे ने डॉक्टरों से इस संबंध में बात की तो उन्होंने बताया कि इंजेक्शन लगने के बाद मौत के चांस बहुत कम होते हैं. पम्मी के पुत्र का माथा ठनका और उसने घर में रखे एक इंजेक्शन का रैपर डॉक्टर को दिखाया. डॉक्टर ने देखते ही कह द‍िया कि इंजेक्शन नकली है.
नकली इंजेक्‍शन द‍िए जाने के मामले में मेड‍िकल स्‍टोर संचालक के ख‍िलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर पम्‍मी लाला के बेटे बुधवार को एसएसपी रोहित सिंह सजवाण से म‍िले और उन्‍हें पूरी बात बताई. एसएसपी ने औषधि विभाग के निरीक्षक को बुलाकर रेमडेसिविर इंजेक्शन की जांच कराई तो वह नकली पाया गया. ज‍िसके बाद मेडिकल के संचालक अनमोल और प्र‍ियांक के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है.


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