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मणिपुर में नगा-कुकी तनाव से बिगड़े हालात, 7 दिन से स्कूल-बाजार बंद, 4 दिनों में 6 मौतों का दावा
jantaserishta.com
17 Sept 2026 11:38 AM IST

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चीनी की कीमत 400 से 450 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है...
नई दिल्ली: मणिपुर के पहाड़ी इलाकों में नगा और कुकी समुदायों के बीच बढ़े तनाव का असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है। कई इलाकों में करीब एक सप्ताह से स्कूल और बाजार बंद हैं। सड़कों और हाईवे पर जगह-जगह रुकावटों के कारण लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। जरूरी सामान की सप्लाई भी बाधित होने से कुछ इलाकों में सामान महंगा मिल रहा है।
कांगपोकपी के कुछ गांवों में स्थानीय लोगों के मुताबिक चीनी की कीमत 400 से 450 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है। हालात ऐसे हैं कि कई लोग घर से बाहर निकलने से बच रहे हैं। ग्रामीणों के लिए खेतों तक जाना भी मुश्किल हो गया है। मेडिकल जरूरत होने पर अस्पताल या एयरपोर्ट तक पहुंचने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कई इलाकों में रास्तों पर नाकेबंदी
उखरुल, सेनापति, तामेंगलोंग और चंदेल को नगा बहुल जिले बताया गया है। वहीं चूराचांदपुर, कांगपोकपी और फिरजॉल में कुकी आबादी अधिक है। कांगपोकपी समेत चार जिलों में दोनों समुदायों की आबादी मौजूद है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रमुख सड़कों और हाईवे पर कई स्थानों पर नाकेबंदी की गई है। कुछ जगहों पर चेक पॉइंट भी बनाए गए हैं। लोगों के अनुसार सुरक्षा एस्कॉर्ट के बिना निजी वाहनों से यात्रा करना आसान नहीं है।
कांगपोकपी की 53 वर्षीय मार्गरेट के अनुसार जिला मुख्यालय में रहने की वजह से उन्हें किसी तरह जरूरी सामान मिल रहा है, लेकिन गांवों की स्थिति ज्यादा कठिन है। उनके मुताबिक कुछ स्थानों पर चीनी 400 से 450 रुपए किलो तक मिल रही है।
35 वर्षीय डेविड ने बताया कि ग्रामीण खेतों में जाने से भी डर रहे हैं। उनका कहना है कि अचानक गोलीबारी की आशंका के कारण लोग घरों से बाहर नहीं निकल रहे। उनके मुताबिक मेडिकल इमरजेंसी या एयरपोर्ट जाने के लिए कुछ जगहों पर नगा समुदाय के सब-डिविजनल ऑफिसर से अनुमति लेनी पड़ रही है।
चावांगकिनिंग में आगजनी और फायरिंग की घटना
कांगपोकपी के चावांगकिनिंग लियांगमाई गांव में बुधवार को कई घरों में आग लगाए जाने की जानकारी सामने आई। कुछ मकानों पर गोलियां चलने की भी बात कही गई है। वहां की दीवारों पर गोलियों के निशान दिखाई देने की जानकारी दी गई।
इससे एक रात पहले मंगलवार को करीब साढ़े 10 बजे चावांगकिनिंग नागा गांव में हथियारबंद लोगों के हमले की सूचना मिली थी। अधिकारियों के मुताबिक हमलावर आधुनिक हथियारों से लैस थे और गांव में गोलीबारी कर रहे थे।
गांव के पास तैनात CRPF जवानों ने जवाबी कार्रवाई की। अधिकारियों के अनुसार दोनों तरफ से रुक-रुककर करीब छह घंटे तक गोलीबारी हुई और यह सिलसिला सुबह लगभग साढ़े चार बजे तक चला। इस दौरान गांव के बाहरी इलाके में मौजूद दो लकड़ी के मकानों में आग लगा दी गई। CRPF ने हमलावरों को गांव के अंदर पहुंचने से रोक दिया।
दो कुकी महिलाओं की हत्या का मामला
तामेंगलोंग जिले के लीसांगफाई गांव में मंगलवार को दो कुकी महिलाओं की गोली लगने से मौत हो गई। इसके साथ ही इलाके के कुछ फार्महाउसों में आग लगाए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
एक कुकी विधायक ने दोनों महिलाओं की हत्या की निंदा करते हुए NSCN-IM और ZUF-K के कैडरों पर इसमें शामिल होने का आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
कुकी संगठनों ने पिछले चार दिनों में चार महिलाओं समेत छह कुकी लोगों की हत्या के लिए नगा समुदाय को जिम्मेदार बताया है। स्थानीय संगठनों का दावा है कि फरवरी में शुरू हुए ताजा संघर्ष के बाद इस साल अब तक करीब 40 लोगों की जान जा चुकी है।
2023 से जारी है मणिपुर में हिंसा
मणिपुर में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच 3 मई 2023 को हिंसा शुरू हुई थी। इसके बाद लंबे समय तक राज्य के कई हिस्सों में तनाव बना रहा। हिंसा के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई और हजारों लोग अपने घरों से विस्थापित हुए।
इस साल फरवरी में उखरुल के लिटन गांव से नगा और कुकी समुदायों के बीच नया विवाद शुरू होने की बात सामने आई। इसके बाद पहाड़ी क्षेत्रों में तनाव और हिंसा की घटनाएं बढ़ीं। सितंबर में तामेंगलोंग और कांगपोकपी में हत्या, गोलीबारी और आगजनी की कई घटनाएं सामने आई हैं।
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