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राम मंदिर दान चोरी मामले में SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट गृह सचिव को सौंपी, कई गंभीर सवाल उठे
Shantanu Roy
23 Jun 2026 1:48 PM IST

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Ayodhya. अयोध्या। अयोध्या के राम मंदिर में दान राशि के कथित दुरुपयोग और चोरी के आरोपों से जुड़े मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। इस रिपोर्ट को लेकर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। तीन सदस्यीय एसआईटी की ओर से तैयार की गई यह रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंपी गई है। हालांकि रिपोर्ट की सामग्री को पूरी तरह गोपनीय रखा गया है, लेकिन सूत्रों के हवाले से कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ रही हैं, जिनसे मंदिर की दान व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत और एसआईटी के अन्य सदस्यों ने संयुक्त रूप से गृह विभाग को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद मीडिया से बातचीत में अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद ने कहा कि यह शासन द्वारा गठित तीन सदस्यीय एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच अभी जारी है और फिलहाल रिपोर्ट के निष्कर्षों को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता क्योंकि यह पूरी प्रक्रिया गोपनीय जांच का हिस्सा है।
संजय प्रसाद ने कहा कि एसआईटी ने उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर अपना प्रारंभिक प्रतिवेदन शासन को सौंप दिया है। अब आगे की कार्रवाई और विस्तृत जांच के संबंध में निर्णय शासन स्तर पर लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आ सकेंगे। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को राम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया था। मंदिर में प्राप्त होने वाली दान राशि के संग्रह, गणना और उसके प्रबंधन को लेकर कुछ गंभीर आरोप सामने आए थे। आरोपों के बाद मंदिर प्रशासन और ट्रस्ट की ओर से निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी, जिसके बाद एसआईटी का गठन किया गया।
सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में दान राशि की गणना प्रक्रिया और उसकी निगरानी व्यवस्था को लेकर कई गंभीर खामियों का उल्लेख किया गया है। जांच के दौरान पाया गया कि दान राशि की गिनती और रिकॉर्डिंग की मौजूदा व्यवस्था में कई स्तरों पर सुधार की आवश्यकता है। रिपोर्ट में इस बात की भी चर्चा की गई है कि गणना प्रक्रिया के दौरान पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त निगरानी तंत्र मौजूद नहीं था। जांच एजेंसी ने दान की गणना करने वाले कर्मचारियों और उनसे जुड़े लोगों की भूमिका की भी विस्तार से पड़ताल की है। सूत्रों का कहना है कि गणना कर्मियों के चयन की प्रक्रिया को भी जांच के दायरे में रखा गया। एसआईटी ने यह जानने का प्रयास किया कि इन कर्मचारियों की नियुक्ति किन मानकों के आधार पर की गई थी और क्या उनकी नियुक्ति में किसी प्रकार की अनियमितता हुई थी।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ गणना कर्मियों और मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारियों के बीच संबंधों की जांच की गई है। हालांकि प्रारंभिक रिपोर्ट में किसी भी व्यक्ति को क्लीन चिट नहीं दी गई है। इसका मतलब है कि जांच एजेंसी अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है और आगे की विस्तृत जांच के बाद ही जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी। सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में कुछ कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की सिफारिश भी की है। हालांकि संबंधित व्यक्तियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। रिपोर्ट में मंदिर की आंतरिक प्रशासनिक व्यवस्था, दान प्रबंधन प्रणाली और निगरानी तंत्र की जवाबदेही से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को रेखांकित किया गया है। जांच एजेंसी का मानना है कि यदि इन व्यवस्थाओं को और अधिक पारदर्शी बनाया जाए तो भविष्य में इस तरह के विवादों की संभावना कम हो सकती है।
एसआईटी ने मामले की व्यापक जांच के लिए अतिरिक्त समय की मांग भी की है। जांच दल का कहना है कि कई तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं की गहन पड़ताल अभी बाकी है। इसके लिए अतिरिक्त संसाधनों, विशेषज्ञों और सहयोगी अधिकारियों की आवश्यकता होगी। माना जा रहा है कि विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। उधर, प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी शुरू हो गई हैं। समाजवादी पार्टी के नेता दीपक रंजन ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें पहले से ही इस तरह की रिपोर्ट की आशंका थी। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में जो बातें सामने आ रही हैं, उनसे उन्हें कोई आश्चर्य नहीं हुआ है।
दीपक रंजन ने आरोप लगाया कि जांच का दायरा केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित रह सकता है, जबकि प्रभावशाली और जिम्मेदार लोगों तक जांच की पहुंच नहीं होगी। उन्होंने कहा कि उन्हें एसआईटी की निष्पक्षता पर भरोसा नहीं है और जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर गंभीर संदेह है। सपा नेता ने यह भी कहा कि जिन संस्थाओं और एजेंसियों पर पहले भी सवाल उठते रहे हों, उनकी रिपोर्ट को पूरी तरह अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके और यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। फिलहाल एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंप दी गई है और अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है। विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दान राशि के कथित दुरुपयोग के आरोपों में कितनी सच्चाई है और इस मामले में किन लोगों की जवाबदेही तय की जाएगी। अयोध्या के राम मंदिर से जुड़ा होने के कारण यह मामला धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।
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