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सिक्किम राष्ट्रीय समय सीमा से पहले पूर्ण साक्षर राज्य बना, राष्ट्रपति मुर्मु ने दी बधाई

SHIDDHANT
27 May 2026 10:21 PM IST
सिक्किम राष्ट्रीय समय सीमा से पहले पूर्ण साक्षर राज्य बना, राष्ट्रपति मुर्मु ने दी बधाई
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Sikkim सिक्किम: केंद्र सरकार की उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा हासिल कर लिया है। यह उपलब्धि सिक्किम ने 2027 के राष्ट्रीय लक्ष्य से पहले ही प्राप्त कर ली है। यह घोषणा गंगटोक स्थित सिक्किम विश्वविद्यालय के सातवें दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की उपस्थिति में की गई। इस अवसर पर सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर, मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग और राज्य के शिक्षा मंत्री राजू बसनेत भी उपस्थित थे। उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम का उद्देश्य वयस्क शिक्षा, बुनियादी साक्षरता और आजीवन शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करना है, ताकि समाज के सभी वर्गों को शिक्षा तक समावेशी पहुंच सुनिश्चित हो सके।
दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने पूर्ण साक्षरता का दर्जा प्राप्त करने के लिए सिक्किम सरकार और वहां की जनता को बधाई दी। राष्ट्रपति ने कहा कि सिक्किम का पूर्णतः साक्षर राज्य होना गर्व की बात है। मैं मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग, उनकी सरकार और सिक्किम के सभी निवासियों को इस उपलब्धि के लिए बधाई देती हूं। उन्होंने साक्षरता पहलों में महिलाओं की भागीदारी की सराहना की और कहा कि माताओं और बहनों का शिक्षा प्राप्त करना इस अभियान की समावेशी प्रकृति को दर्शाता है। मुर्मु ने कहा कि इन प्रयासों और सामूहिक योगदान के कारण ही आज राज्य पूर्णतः साक्षर हो गया है। यह आप सबकी सामूहिक उपलब्धि है।
राज्यपाल माथुर ने इस उपलब्धि को हिमालयी राज्य के लिए गौरव का क्षण बताया और मुख्यमंत्री और उनकी टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। लोकसभा सांसद इंद्र हंग सुब्बा ने कहा कि यह उपलब्धि गांवों और समुदायों में स्वयंसेवकों, शिक्षकों और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के वर्षों के परिश्रम का परिणाम है। उन्होंने इस गति को बनाए रखने और आने वाले वर्षों में राज्य के साक्षरता स्तर को बरकरार रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
अधिकारियों ने बताया कि ग्राम पंचायतों, शहरी स्थानीय निकायों और स्थानीय समुदायों के समन्वित प्रयासों से यह उपलब्धि संभव हो पाई है, जिन्होंने साक्षरता और शैक्षिक जागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लिया। साक्षरता के इस महत्वपूर्ण पड़ाव को सशक्तिकरण, गरिमा और सामाजिक प्रगति की दिशा में एक कदम बताया गया, साथ ही इसे विकसित भारत 2047 के व्यापक दृष्टिकोण में योगदान देने वाला भी बताया गया।
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