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Siddaramaiah: सिद्धारमैया बतौर कर्नाटक सीएम दूसरी पारी के लिए तैयार, जानें इनके बारे में

jantaserishta.com
18 May 2023 1:54 PM IST
Siddaramaiah: सिद्धारमैया बतौर कर्नाटक सीएम दूसरी पारी के लिए तैयार, जानें इनके बारे में
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फाइल फोटो

बेंगलुर (आईएएनएस)| कट्टर समाजवादी माने जाने वाले सिद्दारमैया कर्नाटक के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में अपने दूसरे कार्यकाल के लिए तैयार हैं। एक साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले सिद्दारमैया सामंती और जातिवादी ताकतों से मुकाबला करके सर्वोच्च स्थान पर पहुंचने वाले व्यक्ति हैं।
वह सबसे लोकप्रिय जन नेता हैं और कर्नाटक की कांग्रेस इकाई में अधिकांश विधायकों का उन्हें समर्थन प्राप्त है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि वह व्यक्तिगत रूप से उन्हें पसंद करते हैं और उनका सम्मान करते हैं।
सिद्दारमैया देश के उन चुनिंदा राजनेताओं में से एक हैं जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और आरएसएस को निशाने पर लेते हैं। भगवा ताकतों पर उनके मार्मिक हमलों ने कांग्रेस और जनता में उनका कद बढ़ा दिया है।
चौहत्तर साल के सिद्दारमैया का जन्म 12 अगस्त 1948 को मैसूरु जिले के वरुणा होबली के एक दूरस्थ गांव सिद्दारमा हुंडी में हुआ था। वह एक गरीब कृषक कुरुबा (चरवाहा) समुदाय से हैं। युवराज कॉलेज से बीएससी करने के बाद उन्होंने मैसूर विश्वविद्यालय से एलएलबी किया और कुछ समय के लिए कानून का अभ्यास किया।
छात्र जीवन के दौरान वह एक वाक्पटु वक्ता थे और अपने वक्तृ त्व कौशल के लिए जाने जाते थे। वह डॉ. राम मनोहर लोहिया द्वारा प्रतिपादित समाजवाद से प्रभावित थे।
चामुंडेश्वरी सीट से उन्होंने 1983 में भारतीय लोकदल पार्टी का प्रतिनिधित्व करते हुए सातवीं कर्नाटक विधानसभा में प्रवेश किया। बाद में वह सत्तारूढ़ जनता दल पार्टी में शामिल हो गए। आधिकारिक भाषा के रूप में कन्नड़ के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए वे कन्नड़ वॉचडॉग समिति के पहले अध्यक्ष थे।
उन्होंने कन्नड़ भाषा और राज्य की संस्कृति के संवर्धन के लिए प्रयास किया। बाद में वह रेशम उत्पादन राज्य मंत्री बने और राज्य में रेशम उत्पादन विभाग और रेशम उद्योग के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह शोषित वर्गों की आवाज बने।
सिद्दारमैया ने पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा का विश्वास जीता और राज्य की राजनीति में शीर्ष नेताओं में से एक के रूप में सुर्खियों में आए। बाद में उन्होंने देवेगौड़ा से नाता तोड़ लिया, उन्हें चुनौती दी और अहिंदा (अल्पसंख्य, पिछड़ों और दलितों का आंदोलन) शुरू किया।
वह 2006 में कांग्रेस में शामिल हुए और 2013 से 2018 तक कर्नाटक के 22वें मुख्यमंत्री बने। उन्होंने 1983 से 1989, 1994 से 1999, 2004 से 2007 तक चामुंडेश्वरी निर्वाचन क्षेत्र से विधायक के रूप में कार्य किया। वह 2008 से 2013 तक वरुणा निर्वाचन क्षेत्र से विधायक थे और 2013 से 2018 तक और बादामी निर्वाचन क्षेत्र से ।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य करने से पहले उन्होंने 1996 से 1999 तक दिवंगत जे.एच. पटेल नीत जनता दल सरकार में वह उप मुख्यमंत्री के रूप में भी कार्य किया।
वह 2004 से 2005 तक धर्म सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस-जद (एस) गठबंधन सरकार में भी उपमुख्यमंत्री पद पर रहे।
सिद्दरमैया 2009 से 2013 और 2019 से 2023 तक विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे।
उन्होंने पशुपालन और पशु चिकित्सा सेवाओं के मंत्री के रूप में भी काम किया। सिद्धारमैया ने विभिन्न नियुक्तियों के दौरान वित्त और आबकारी विभागों को संभाला। उनके कार्यकाल में राज्य ने कभी भी ओवरड्राफ्ट नहीं किया। क्रेडिटर रेटिंग कंपनी ने कर्नाटक को अच्छी वित्तीय स्थिति वाले राज्य का दर्जा दिया था।
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