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नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता (LoP) राहुल गांधी ने गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अगुवाई वाली केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने CEC को सलाह दी कि वे इस्तीफा दे दें और वोटों की कथित "चोरी" के मामले में "सरकारी गवाह" (approver) बन जाएं।
यह बात एक मीडिया रिपोर्ट के एक दिन बाद सामने आई है, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयोग के भीतर मतदाता सूची के 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) और अन्य मुद्दों को लेकर मतभेद हैं। हालांकि, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया है।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने BJP के खिलाफ "सत्ता-विरोधी लहर" (anti-incumbency) के न होने पर सवाल उठाए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि सत्ता-विरोधी लहर का असर "किसी को नहीं छोड़ता"।
विपक्ष के नेता ने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध में भारत को जीत दिलाने के एक-दो साल के भीतर ही वे भी "सत्ता-विरोधी लहर" का शिकार हो गई थीं।
राहुल गांधी ने इसे एक "बुनियादी" सवाल बताते हुए कहा, "सालों से चली आ रही सत्ता-विरोधी लहर महाराष्ट्र, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से अचानक गायब हो जाती है।"
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया, "यह हर भारतीय की अभिव्यक्ति के बुनियादी ढांचे और विचार पर हमला है।"
उन्होंने अपने पुराने आरोप को दोहराया कि 2014 के लोकसभा चुनाव और कई अन्य विधानसभा चुनावों में धांधली हुई थी।
उन्होंने कहा, "भारत के संस्थागत ढांचे द्वारा मेरे सवालों को नजरअंदाज किया जा रहा था।"
विपक्ष के नेता ने जोर देकर कहा कि "अगर वोट चोरी हुए हैं, तो चोरी के वोटों से जीतने वाले सांसदों द्वारा बनाया गया कोई भी कानून गैर-कानूनी है।"
उन्होंने आगे कहा, "उनके द्वारा किए गए कोई भी संस्थागत बदलाव भी गैर-कानूनी हैं।" राहुल गांधी ने 21 दिसंबर, 2023 को पास हुए एक कानून का ज़िक्र किया, जो "चुनाव आयुक्त को जांच से बचाता है" और कांग्रेस के पहले लगाए गए "वोट चोरी" के आरोपों (जिसमें 'वोटर अधिकार यात्रा' भी शामिल है) का भी ज़िक्र किया।
मीडिया रिपोर्ट के दावों का हवाला देते हुए, विपक्ष के नेता (LoP) ने आरोप लगाया कि दो चुनाव आयुक्तों की ओर से भेजे गए पत्रों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, "क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और अन्य लोग ज्ञानेश कुमार को बचा रहे थे।"
यह दावा करते हुए कि भारतीय चुनाव प्रणाली की पोल खुल गई है, राहुल गांधी ने कहा कि इसे साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं।
उन्होंने कहा, "आज़ाद भारत के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। आज चुनाव प्रणाली पूरी तरह से चरमरा गई है और संसद से पास हुए कानूनों पर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि वोटों को बर्बाद कर दिया गया है।"
राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार के तुरंत इस्तीफ़े की भी मांग की।
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को सीधे संबोधित करते हुए, विपक्ष के नेता ने कहा: "आपने जो किया है, वह देशद्रोह के बराबर है। यह संविधान और देश के कानूनी ढांचे पर हमला है... आपकी ज़िम्मेदारी थी कि आप वोटों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।"
उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "हम भारत में लोकतंत्र को बर्बाद होते हुए देखकर चुप नहीं बैठेंगे। इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों को कभी न कभी सज़ा ज़रूर मिलेगी।"
राहुल गांधी ने दो चुनाव आयुक्तों की तारीफ़ करते हुए कहा कि उन्होंने "सच सामने लाकर समझदारी भरा काम किया है"।
साथ ही, विपक्ष के नेता ने ज्ञानेश कुमार को "सरकारी गवाह" (approver) बनने की सलाह दी और कहा कि यह देशभक्ति का काम होगा।
राहुल गांधी ने कहा, "प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) और गृह मंत्री अमित शाह ने जो किया है, उसकी निश्चित रूप से जांच होगी... यह भारतीय राज्य और उसके लोगों के ख़िलाफ़ किया गया काम है। जो व्यक्ति वोटों पर हमला करता है और भारत के लोकतांत्रिक संस्थानों को पूरी तरह से नष्ट करता है, वह देशद्रोही है, और कुछ नहीं।"
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