
कांग्रेस थरूर से नाराज है क्योंकि उन्होंने पार्टी की नीति से हटकर कई मामलों पर अपनी राय दी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका दौरे और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से उनकी मुलाकात की उन्होंने सराहना की थी। इसके अलावा, केरल में एलडीएफ सरकार के द्वारा कि गए औद्योगिक विकास की सराहना करने वाले उनके लेख ने पार्टी में असंतोष पैदा कर दिया था। यह जानकारी भी सामने आई है कि थरूर पार्टी लाइन हटने का मन बना चुके हैं, क्योंकि उनका मानना है कि उन्हें उचित सम्मान नहीं मिल रहा है। राहुल गांधी से मुलाकात के दौरान थरूर ने इस बात पर भी असंतोष व्यक्त किया कि उन्हें "ऑल इंडिया प्रोफेशनल कांग्रेस" के प्रभारी पद से हटा दिया गया, जो उन्होंने खुद गठित किया था।
शशि थरूर ने इस बात को लेकर भी विरोध जताया कि संसद में प्रमुख बहसों के दौरान उन्हें उपेक्षित किया जा रहा है, उन्हें अवसर नहीं दिए जा रहे हैं। थरूर ने राहुल गांधी से कहा कि वह संसद में पार्टी के नेतृत्व को संभालने में सक्षम हैं, लेकिन चुप रहे क्योंकि राहुल गांधी को संसद पार्टी नेता नियुक्त किया गया था।शशि थरूर ने राहुल गांधी से यह सवाल भी किया कि क्या पार्टी चाहती है कि वह राज्य राजनीति पर ध्यान केंद्रित करें, लेकिन राहुल ने इस पर कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया। थरूर ने यह जानना चाहा कि अगर कांग्रेस का ऐसा इरादा है, तो उनकी भूमिका क्या होगी। इस पर राहुल ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस का परंपरा नहीं है कि चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार का चयन किया जाए।





