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कांग्रेस की तरफ से राष्ट्रपति भवन के रात्रि भोज में शामिल हुए शशि थरूर

Shantanu Roy
5 Dec 2025 9:43 PM IST
कांग्रेस की तरफ से राष्ट्रपति भवन के रात्रि भोज में शामिल हुए शशि थरूर
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New Delhi. नई दिल्ली। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सम्मान में राष्ट्रपति भवन में होने वाले विशेष डिनर कार्यक्रम से जुड़ा विवाद शुक्रवार को उस समय गहरा गया, जब कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पुष्टि की कि उन्हें इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आधिकारिक निमंत्रण मिला है। कांग्रेस के तिरुवनंतपुरम से सांसद और संसद की विदेश मामलों की समिति के प्रमुख शशि थरूर ने पार्लियामेंट कॉम्प्लेक्स के बाहर मीडिया से बातचीत में कहा कि वह डिनर में जरूर शामिल होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें उनके पद के आधार पर निमंत्रण भेजा गया है, और यह एक औपचारिक कार्यक्रम है जिसमें उनकी उपस्थिति उचित है।

लेकिन इस आमंत्रण के साथ ही राजनीतिक विवाद उस समय भड़क उठा, जब कांग्रेस ने आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में नहीं बुलाया गया। कांग्रेस ने इसे न केवल ‘असम्मानजनक’ बल्कि ‘प्रोटोकॉल का खुला उल्लंघन’ बताया। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह फैसला हैरान करने वाला है और यह दिखाता है कि सरकार लोकतांत्रिक परंपराओं और संसदीय शिष्टाचार को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों विपक्ष के नेताओं राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को कोई निमंत्रण नहीं भेजा गया, जबकि यह परंपरा रही है कि ऐसे उच्च स्तरीय अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में विपक्ष की शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी सुनिश्चित की जाती है।
खेड़ा ने कहा, “यह हैरानी की बात है, लेकिन हमें हैरान नहीं होना चाहिए क्योंकि यह सरकार सभी प्रोटोकॉल तोड़ने की आदी है। विपक्ष के नेता देश की लोकतांत्रिक संरचना का अहम हिस्सा हैं। उन्हें नजरअंदाज करना लोकतांत्रिक मान्यताओं को कमजोर करना है।” खेड़ा ने न सिर्फ सरकार पर सवाल उठाए, बल्कि शशि थरूर की ओर भी नाराजगी जताई कि उन्होंने निमंत्रण स्वीकार करने का निर्णय क्यों लिया। उन्होंने कहा कि थरूर को यह समझना चाहिए था कि यह सरकार क्यों और किस उद्देश्य से विभिन्न नेताओं को चुनकर निमंत्रण भेज रही है। उन्होंने कहा, “हर किसी की अंतरात्मा की आवाज होती है। जब मेरे नेताओं को नहीं बुलाया गया, लेकिन मुझे बुलाया गया, तो हमें समझना चाहिए कि यह खेल क्यों खेला जा रहा है, यह खेल कौन खेल रहा है। ऐसे में हमें इसका हिस्सा क्यों बनना चाहिए?”
थरूर की मौजूदगी को लेकर पार्टी में आंतरिक असहजता साफ तौर पर दिखाई दी। हालांकि थरूर ने इस मामले पर सीधी प्रतिक्रिया देने से बचते हुए कहा कि उन्हें संस्थागत प्रोटोकॉल के आधार पर बुलाया गया है और वह अपने पद की गरिमा के अनुरूप समारोह में शामिल होंगे। इस विवाद से पहले राहुल गांधी ने भी संसद परिसर में मीडिया से बातचीत में केंद्र सरकार पर आरोप लगाया था कि वह विदेशी मेहमानों को विपक्ष के नेता से मिलने की परंपरा का पालन नहीं कर रही। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार की ‘असुरक्षा’ के कारण कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों को विपक्ष के शीर्ष नेतृत्व से मिलने का अवसर नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा, “यह दशकों से चली आ रही परंपरा है कि भारत आने वाले विदेशी नेता विपक्ष के नेता से भी मुलाकात करते हैं। लेकिन यह सरकार लोकतांत्रिक परंपराओं से डरती है और उन्हें तोड़ रही है।”
कांग्रेस का यह भी कहना है कि राष्ट्रपति भवन में होने वाला यह डिनर सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि ऐसा अवसर होता है जहां विभिन्न दलों के शीर्ष नेता और विदेशी प्रतिनिधि एक साथ बातचीत कर देश की राजनीतिक प्रतिबद्धता और परिपक्वता को प्रदर्शित करते हैं। ऐसे में विपक्ष के दोनों प्रमुख नेताओं को बाहर रखना कई सवाल खड़े करता है। विरोधी दलों ने इस घटना को लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक परंपराओं के हनन के रूप में देखा है, जबकि सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। अब पुतिन के भारत दौरे के बीच यह डिनर कार्यक्रम न केवल कूटनीतिक बल्कि राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा का मुख्य विषय बन गया है।
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