
हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि आरंभ होते हैं। नवरात्रि के दिनों में मां दुर्गा और उनके नौ अलग-अलग स्वरूपों की विधि-विधान के साथ पूजा करने का विधान होता है। नवरात्रि के पहले दिन माता के आगमन पर उनका स्वागत किया जाता है, कलश स्थापना के साथ मां के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-आराधना होती है। नवरात्रि पर नौ दिनों तक व्रत रखने के साथ हर दिन मंत्र, आरती और चालीसा का पाठ किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि पर मां दुर्गा की चालीसा का पाठ करने से सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है।11 अक्तूबर 2026 को मां के स्वागत और कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 19 मिनट से लेकर 10 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। इस तरह से कलश स्थापना के लिए करीब 4 घंटे का समय मिलेगा। कलश स्थापना के लिए सुबह का समय पूजा के लिए बहुत ही शुभ और उत्तम माना जाता है।
सफाई और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, साफ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें। इसके बाद घटस्थापना और व्रत का संकल्प लें।जौ बोना: एक साफ मिट्टी के पात्र में मिट्टी भरकर उसमें जौ बोएं।कलश स्थापना: तांबे या मिट्टी के कलश में शुद्ध जल और थोड़ा सा गंगाजल भरें। उसमें सिक्का, सुपारी, अक्षत (बिना टूटे चावल) और हल्दी डालें।
पत्ते और नारियल: कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते रखें और उसके ऊपर लाल कपड़े में लिपटा हुआ नारियल रखें। इसे जौ वाले पात्र के मध्य स्थापित करें।देवी की आराधना: घी का दीपक और धूप जलाएं। मां शैलपुत्री को सफेद फूल, अक्षत, कुमकुम और फल अर्पित करें।मंत्र जाप: मां शैलपुत्री के मंत्र "ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमḥ" का जाप करें।





