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Bhilwara भीलवाड़ा। धर्म और आस्था की नगरी भीलवाड़ा के आजाद नगर बी सेक्टर में शुक्रवार को देव-विवाह का अलौकिक दृश्य देखने को मिला। अवसर था छबीला हनुमान मंदिर में आयोजित भगवान शालिग्राम जी और माता तुलसी के पाणिग्रहण संस्कार का। इस दौरान न केवल तुलसी-शालिग्राम का विवाह हुआ, बल्कि प्रकृति संरक्षण का संदेश देते हुए बड़ और पीपल की भी पूरे विधि-विधान से शादी रचाई गई। शुक्रवार सुबह जैसे ही मंगल वेला में पाणिग्रहण संस्कार संपन्न हुआ, पूरा क्षेत्र जय चारभुजा नाथ के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो उठा। बैंड-बाजों की मधुर स्वर लहरियों ने माहौल को उत्सवमय बना दिया। श्रद्धालुओं ने कन्यादान में आभूषण, वस्त्र सहित विभिन्न उपहार व नकदी दी।
इससे पूर्व आजाद नगर बी सेक्टर स्थित चारभुजानाथ मंदिर से शालिग्राम जी बारात लेकर आए। उनका भव्य स्वागत किया गया। छबीला हनुमान मंदिर के पुजारी रामस्वरूप वैष्णव ने बताया कि पाणिग्रहण संस्कार के बाद ठाकुरजी (शालिग्राम जी) और तुलसी मैया को भावभीनी विदाई दी गई। विदाई का दृश्य ऐसा था मानो साक्षात देवलोक धरती पर उतर आया हो। श्रद्धालु दूल्हे बने ठाकुरजी के बेवाण को अपने हाथों में उठाकर चल रहे थे। दुल्हन स्वरूप तुलसी मैय्या को भक्त अपने सिर पर विराजमान कर पैदल ही चारभुजा नाथ मंदिर की ओर रवाना हुए। विदाई यात्रा के दौरान महिला और पुरुष श्रद्धालु भक्ति गीतों पर झूमते-गाते नजर आए। भगवान् चारभुजा नाथ के जयकारे गूंजते रहे। रास्ते भर लोगों ने देव-स्वरूपों के दर्शन किए और आशीर्वाद दिया।
इससे पूर्व आजाद नगर बी सेक्टर स्थित चारभुजानाथ मंदिर से शालिग्राम जी बारात लेकर आए। उनका भव्य स्वागत किया गया। छबीला हनुमान मंदिर के पुजारी रामस्वरूप वैष्णव ने बताया कि पाणिग्रहण संस्कार के बाद ठाकुरजी (शालिग्राम जी) और तुलसी मैया को भावभीनी विदाई दी गई। विदाई का दृश्य ऐसा था मानो साक्षात देवलोक धरती पर उतर आया हो। श्रद्धालु दूल्हे बने ठाकुरजी के बेवाण को अपने हाथों में उठाकर चल रहे थे। दुल्हन स्वरूप तुलसी मैय्या को भक्त अपने सिर पर विराजमान कर पैदल ही चारभुजा नाथ मंदिर की ओर रवाना हुए। विदाई यात्रा के दौरान महिला और पुरुष श्रद्धालु भक्ति गीतों पर झूमते-गाते नजर आए। भगवान् चारभुजा नाथ के जयकारे गूंजते रहे। रास्ते भर लोगों ने देव-स्वरूपों के दर्शन किए और आशीर्वाद दिया।
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