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सेमीकॉन इंडिया 2026: पीएम मोदी ने बताया भारत के सेमीकंडक्टर मिशन का अगला रोडमैप

jantaserishta.com
17 Sept 2026 3:47 PM IST
सेमीकॉन इंडिया 2026: पीएम मोदी ने बताया भारत के सेमीकंडक्टर मिशन का अगला रोडमैप
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नई दिल्ली: पीएम मोदी ने दिल्ली के यशोभूमि में सेमीकॉन इंडिया 2026 के पांचवें एडिशन का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है और दुनिया का भरोसा भी देश पर बढ़ रहा है।पीएम के मुताबिक, भारत में बनी सेमीकंडक्टर चिप्स अब देश के साथ-साथ विदेशों के बाजारों तक भी पहुंचने लगी हैं।
पीएम मोदी ने चिप सेक्टर में भारत की बढ़ती ताकत का जिक्र किया
कार्यक्रम में पीएम मोदी ने सितंबर में आई तिमाही GDP रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि मुश्किल हालात के बावजूद भारत ने 7.8% की ग्रोथ दर्ज की। उन्होंने यह भी बताया कि जापान की एक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने भारत की सॉवरेन रेटिंग को अपग्रेड किया है। पीएम के अनुसार, ऐसा करीब 35 साल बाद हुआ है।
उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर का काम सिर्फ फैक्ट्री लगाने तक सीमित नहीं है। इस सेक्टर में जरूरी तकनीकी क्षमता तैयार करने में कई दशक लगते हैं। भारत ने एक साथ चिप डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, इक्विपमेंट बनाने और टेस्टिंग की क्षमता पर काम किया है।
दूसरे फेज में ₹1.18 लाख करोड़ का लक्ष्य
पीएम ने बताया कि भारत ने सेमीकंडक्टर मिशन का दूसरा फेज शुरू कर दिया है। पहले फेज की वैल्यू करीब ₹70,400 करोड़ थी, जबकि दूसरे फेज के लिए ₹1.18 लाख करोड़ का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने AI से जुड़ी नई तकनीकों पर भी जोर दिया। पीएम ने कहा कि कंपाउंड सेमीकंडक्टर और सिलिकॉन फोटोनिक्स को भी सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का हिस्सा बनाने की जरूरत है। इन तकनीकों का इस्तेमाल AI से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जरूरी है। साथ ही भारत की सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। पीएम ने बताया कि इसके लिए कई सुधार किए गए हैं और इक्विपमेंट कंपनियों से इन मौकों का फायदा उठाने की अपील की।
विदेशी कंपनियों के लिए सहयोग के रास्ते खोलने पर जोर
पीएम मोदी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भारतीय स्टार्टअप्स, डिजाइन फर्म्स और OCI के स्वामित्व वाली संस्थाओं के साथ मिलकर काम कर सकती हैं। इसके लिए सरकार पॉलिसी, फंडिंग और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क से जुड़े कदम उठा रही है।
उन्होंने कहा कि भारत की सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में सफलता का असर सिर्फ देश तक नहीं रहेगा। इससे पूरी ग्लोबल सप्लाई चेन को मजबूती मिलेगी। पीएम ने यह बात ऐसे समय में खास अहम बताई, जब सप्लाई चेन को हथियार के तौर पर इस्तेमाल किए जाने की बात कही जा रही है। AI चिप्स के लिए ऊर्जा की जरूरत पर भी उन्होंने बात की। पीएम ने बताया कि AI डेटा सेंटर में हजारों हाई-परफॉर्मेंस प्रोसेसर एक साथ बड़ी मात्रा में डेटा प्रोसेस करते हैं, इसलिए सेमीकंडक्टर सेक्टर के साथ ऊर्जा सुरक्षा भी जरूरी है।
युवाओं और इंडस्ट्री से रिसर्च बढ़ाने की अपील
पीएम ने भारत में रिसर्च कर रहे युवाओं से आगे आने की अपील की। विदेशों में रिसर्च कर रहे युवाओं से भी उन्होंने भारत में एडवांस टेक्नोलॉजी के विकास से जुड़ने को कहा। पीएम ने भारत में ही चिप डिजाइन और उससे जुड़ी बौद्धिक संपदा तैयार करने पर भी जोर दिया। पीएम ने कहा कि देश में ज्यादा फैबलेस कंपनियां और चिप से जुड़ी IP तैयार होनी चाहिए। कंपाउंड सेमीकंडक्टर और सिलिकॉन फोटोनिक्स में भी आगे बढ़ने की जरूरत है। उन्होंने ‘टेप-आउट’ का उदाहरण देते हुए कहा कि चिप का डिजाइन उत्पादन के लिए भेज देना आखिरी कदम नहीं है। टेप-आउट के बाद उसी दिन अगली और बेहतर चिप पर काम शुरू हो जाता है।
600 से ज्यादा प्रदर्शक और 40 से अधिक देशों की भागीदारी
सेमीकॉन इंडिया 2026 का आयोजन 17 से 19 सितंबर तक होगा। इसकी थीम ‘सिलिकॉन से सिस्टम तक: इकोसिस्टम का निर्माण’ रखी गई है। इसमें सेमीकंडक्टर कंपनियों के अलावा निवेशक, रिसर्चर, स्टार्टअप, शिक्षाविद और छात्र हिस्सा ले रहे हैं। कार्यक्रम में 600 से ज्यादा प्रदर्शक हैं, जिनमें करीब 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियां शामिल हैं। 40 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधिमंडल भी यहां पहुंचे हैं।
ASML, Applied Materials, Teradyne, Infineon, NXP, Tata Electronics, Micron, Lam Research, CG Power, Advantest और Tokyo Electron जैसी कंपनियां निवेश, तकनीक, सप्लाई चेन और बिजनेस पार्टनरशिप से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगी।
जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, नीदरलैंड, सिंगापुर और स्वीडन के कंट्री पवेलियन भी लगाए गए हैं। इसके अलावा भारतीय राज्यों के पवेलियन भी मौजूद रहेंगे। ‘सैंड टू सिलिकॉन टू सिस्टम्स’ खास आकर्षण होगा, जिसमें चिप बनने से लेकर तैयार इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम तक की प्रक्रिया दिखाई जाएगी।
12 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी, तीन यूनिट में उत्पादन शुरू
सरकार अब तक देश में 12 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे चुकी है। सरकार के मुताबिक, पहले चरण में मंजूर तीन यूनिट्स में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हो चुका है। केंद्र ने सेमीकॉन 2.0 को भी मंजूरी दी है। इसका मकसद भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को आगे बढ़ाना है।
चिप डिजाइन के लिए 400 से ज्यादा शैक्षणिक संस्थानों और 105 स्टार्टअप्स को EDA टूल्स उपलब्ध कराए गए हैं। वहीं, Design Linked Incentive यानी DLI स्कीम के तहत 24 स्टार्टअप्स को मंजूरी दी गई है।
सेमीकंडक्टर पर इतना जोर क्यों?
भारत चिप डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग, पैकेजिंग और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम तक अपनी क्षमता तैयार कर रहा है। इसका उद्देश्य चिप की सप्लाई के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम करना और भारत में इस सेक्टर से जुड़े कारोबार और तकनीक को बढ़ावा देना है।
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