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लिखित आश्वासन के बाद मिली राहत
लखनऊ: पुलिस एसटीएफ को नागपुर जिला अदालत से बड़ी सफलता मिली है। हजरतगंज हत्याकांड में फरार चल रही श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि दुबे और ड्राइवर दानिश उर्फ तनवीर अली को लखनऊ ले जाने के लिए कोर्ट ने 72 घंटे का ट्रांजिट रिमांड मंजूर किया है। उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा अदालत में दिया गया आवेदन सामने आया है। रिपोर्ट कोतवाली हजरतगंज कमिश्नरेट उत्तर प्रदेश की ओर से मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, जिला नागपुर, को संबोधित करते हुए कहा गया कि थाना हजरतगंज में 10 अक्टूबर को पंजीकृत मुकदमे में वांछित अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है।
The SEM Court on October 21 rejected the need for further judicial custody of CJP leaders Ashutosh Ranka and Saurav Das after they submitted written undertakings promising to maintain peace, uphold law and order, and not call for protests at Jantar Mantar until it is de-notified in accordance with law. The court directed them to furnish personal and surety bonds of ₹50,000 each and ordered their release.
— IANS (@ians_india) October 21, 2026
गिरफ्तार अभियुक्तों में पहली अभियुक्त श्रद्धा दुबे (उम्र 28 से 32) है। उनका हाल का पता 4 बी फ्लैट, अवध्रीन अपार्टमेंट, नारायण रोड, सुल्तानगंज, हजरतगंज है, जबकि उनका मूल निवास 340 पुष्पवाटिका, राजाजीपुरम, मालिकाऊं आईमा, जनपद रायबरेली है। दूसरी अभियुक्त रश्मि दुबे (28) वर्ष है। उसका पता ओमेक्स आर 2 टावर, फ्लैट नंबर 2, सुशांत गोल्फ सिटी, लखनऊ है। तीसरा अभियुक्त तनवीर अली उर्फ दानिश थाना आलमबाग, लखनऊ का निवासी है।
पुलिस ने आवेदन में बताया कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट लखनऊ द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट और सहायक पुलिस आयुक्त हजरतगंज द्वारा गठित कमेटी के आदेश पर थानाध्यक्ष शिवमंगल सिंह के नेतृत्व में संयुक्त पुलिस टीम ने नागपुर के थाना बेलतरोड़ी के सहयोग से महिला एएसआई 5077 स्नेहलता जयभारे की मौजूदगी में एक अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 1105 से तीनों को 20 अक्टूबर 2026 को शाम 4 बजे नियमानुसार गिरफ्तार किया।
महिला हवालात मौजूद न होने के कारण नागपुर शहर के थाने में ही मेडिकल परीक्षण कराया गया। पुलिस ने कोर्ट से अपील की कि जनपद नागपुर से लखनऊ की दूरी करीब 900 किलोमीटर है, जिसे उचित साधन से तय करना है, इसलिए 72 घंटे का ट्रांजिट रिमांड दिया जाए ताकि समय पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट लखनऊ के समक्ष पेश कर न्यायिक हिरासत ली जा सके।
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