SC का फैसला, कर्मचारी को पदोन्नति का अधिकार नहीं, लेकिन विचार का अधिकार है

New Delhi नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि किसी कर्मचारी को पदोन्नति का अधिकार भले न हो, लेकिन जब पदोन्नति की प्रक्रिया हो रही हो, तो उसे उसके लिए विचार किए जाने का अधिकार जरूर है, जब तक कि वह अयोग्य न हो।
यह टिप्पणी तमिलनाडु के एक पुलिस कांस्टेबल की अपील पर दी गई, जिसे सब-इंस्पेक्टर पद के लिए पदोन्नति में शामिल नहीं किया गया था। कोर्ट ने कहा कि वर्ष 2005 में उस पर वेतनवृद्धि टालने की सजा दी गई थी, लेकिन यह सजा नवंबर 2009 में रद्द कर दी गई थी। इसके बावजूद, 2019 में पदोन्नति प्रक्रिया में उसे शामिल नहीं किया गया।
कोर्ट ने माना कि विभागीय दंड रद्द होने के बावजूद पदोन्नति से वंचित करना गलत है और उसे आयुसीमा से परे जाकर भी पदोन्नति के लिए विचार किया जाना चाहिए। यदि योग्य पाया जाए, तो 2019 से पदोन्नति दी जाए और सभी लाभ भी दिए जाएं।





