भारत
स्कैन-एंड-शेयर सेवा ने बचाया 10 लाख मरीजों का समय, अस्पतालों की लंबी कतार से निजात
jantaserishta.com
29 March 2023 2:13 PM IST

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स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक इसके कारण रोगियों और उनके तीमारदारों को अस्पतालों की लंबी कतारों से निजात मिली है।
नई दिल्ली (आईएएनएस)| 'स्कैन-एंड-शेयर' सेवा के शुरूआती छह महीने के भीतर ही यह संख्या 10 लाख पंजीकरण को पार कर गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक इसके कारण रोगियों और उनके तीमारदारों को अस्पतालों की लंबी कतारों से निजात मिली है। इस सेवा के अंतर्गत रोगियों को ओपीडी टोकन दिए जाते हैं, ऐसे में रोगियों को चेकअप के लिए एक तय समय आवंटित कर दिया जाता है जिससे उन्हें लाइनों में लगने की आवश्यकता नहीं पड़ती। 'स्कैन-एंड-शेयर' एक ऐसी सेवा है, जिससे ओपीडी में मरीजों का तुरंत पंजीकरण हो जाता है। सेवा के शुरूआती छह महीने के भीतर ही यह संख्या 10 लाख पंजीकरण को पार कर गई है। उल्लेखनीय है कि पिछले महीने (23 फरवरी, 2023 के संदर्भ में) ही पांच लाख मरीजों ने पंजीकरण करवाया। स्कैन-एंड-शेयर सेवा का प्रभाव और उसकी स्वीकृति इस बात से साबित हो जाती है कि यह संख्या तेजी से बढ़ रही है।
स्कैन-एंड-शेयर सेवा के विषय में एनएचए के सीईओ ने कहा, "एबीडीएम का लक्ष्य डिजिटल समाधानों के उपयोग से निर्बाध स्वास्थ्य आपूर्ति तैयार करना है। स्कैन-एंड-शेयर की पहल होने से अस्पताल मरीजों की आभा (एबीएचए) प्रोफाइल के जरिये सीधे उनकी डिजिटल पंजीकरण सेवा की पेशकश कर रहे हैं। इससे मरीजों को फौरन पंजीकरण टोकन मिल जाता है और उन्हें कतारों में लगने और लंबा-चौड़ा विवरण लिखने से राहत मिल जाती है। इस समय, प्रति दिन औसतन लगभग 25,000 ओपीडी टोकन दिए जा रहे हैं। हमारा इरादा है कि जल्द इसे प्रतिदिन एक लाख टोकन से अधिक कर दिया जाए। इसके अलावा, हम मरीजों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के बीच अन्य प्रकार के संवादों के लिये इस पहल को और आगे बढ़ा रहे हैं।"
स्कैन और शेयर सेवा क्यूआर-कोड आधारित है और यह जानकारी साझा करने के एक सरल माध्यम पर काम करती है। इसमें शामिल अस्पताल अपने रोगी पंजीकरण काउंटरों पर अपने विशेष क्यूआर कोड प्रदर्शित करते हैं। मरीज सेवा के लिए समर्थित मोबाइल ऐप (वर्तमान में एबीएचए ऐप, आरोग्य सेतु, ड्रिफकेस, पेटीएम, बजाज हेल्थ और एकाकेयर में उपलब्ध) का उपयोग कर क्यूआर कोड स्कैन करने के लिए अपने स्मार्टफोन का उपयोग करते हैं। इसके बाद मरीज अपना आभा (आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट) बनाता है या अपने मौजूदा आभा अकाउंट पर लॉग-इन करता है। लॉग-इन करने के बाद, मरीज किसी तरह का फॉर्म भरे बिना अपना पंजीकरण पूरा करने के लिए सीधे अस्पताल के साथ अपनी आभा प्रोफाइल साझा कर सकता है। इस कागज-रहित पंजीकरण के परिणामस्वरूप तत्काल टोकन तैयार हो जाता है। इस तरह आभा का इस्तेमाल कर मरीज को लंबी कतार में लगने से छुटकारा मिल जाता है।
यह सेवा लेडी हाडिर्ंग मेडिकल कॉलेज (एलएचएमसी) और श्रीमती सुचेता कृपलानी अस्पताल (एसएसकेएच) अस्पताल, नई दिल्ली में छह अक्टूबर, 2022 को शुरू की गई थी। तब से, 443 जिलों में 147 से अधिक अस्पतालों ने इस सेवा को अपनाया है, जिसके कारण रोज ओपीडी में पंजीकरण कराने के लिये कतार में लगने वाला समय बच रहा है। एम्स-रायपुर, एनडीएमसी चरक पालिका अस्पताल- नई दिल्ली, एलएचएमसी और एसएसकेएच- नई दिल्ली, सर सीवी रमन जनरल अस्पताल - बेंगलुरु और एलबीआरएन संयुक्त अस्पताल, कानपुर रोड - लखनऊ एबीएचए-आधारित स्कैन और शेयर सेवा का उपयोग करके रोज 25,000 से अधिक रोगियों की मदद कर रहे हैं।
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