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TASMAC भ्रष्टाचार मामले में SC का फैसला

Saba Naaz
31 July 2026 2:49 PM IST
TASMAC भ्रष्टाचार मामले में SC का फैसला
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नई दिल्ली। तमिलनाडु के चर्चित TASMAC भ्रष्टाचार मामले में डीएमके नेता और पूर्व मंत्री वी. सेंथिल बालाजी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने नए भ्रष्टाचार मामले में उनकी गिरफ्तारी पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है और उन्हें अग्रिम जमानत प्रदान कर दी है। अदालत ने यह राहत कुछ शर्तों के साथ दी है, जिनका पालन सेंथिल बालाजी को करना होगा।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने शुक्रवार को सेंथिल बालाजी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। अदालत ने कहा कि बालाजी जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करेंगे। इसके अलावा उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना होगा और वह किसी भी गवाह को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमानत की शर्तों का किसी भी तरह उल्लंघन होने पर अदालत इस आदेश में बदलाव कर सकती है। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता से कहा कि अगर जमानत की शर्तों का थोड़ा भी उल्लंघन होता है तो तत्काल अदालत का रुख किया जा सकता है।

इससे पहले मद्रास हाई कोर्ट ने TASMAC भ्रष्टाचार मामले में सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (DVAC) की ओर से दर्ज एफआईआर में सेंथिल बालाजी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट के फैसले के बाद उनकी गिरफ्तारी का खतरा बढ़ गया था। इसके बाद सेंथिल बालाजी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सेंथिल बालाजी की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी और अमित आनंद तिवारी ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत से तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए कहा था कि बालाजी को गिरफ्तारी से सुरक्षा दी जानी चाहिए।

वकीलों ने दलील दी कि दर्ज की गई एफआईआर उन घटनाओं से जुड़ी है जो कथित रूप से वर्ष 2021 से 2025 के बीच हुई थीं। उन्होंने कहा कि सेंथिल बालाजी के फरार होने की कोई संभावना नहीं है और जांच के लिए उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करने की आवश्यकता नहीं है।

सेंथिल बालाजी की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध के तहत दर्ज किया गया है। उनके वकीलों ने दावा किया कि एफआईआर में लगाए गए आरोप प्रवर्तन निदेशालय (ED) के हलफनामे और सुप्रीम कोर्ट में दायर दस्तावेजों से लिए गए हैं।

TASMAC यानी तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन से जुड़े इस मामले में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच की जा रही है। एफआईआर के अनुसार, शराब दुकानों और बार के लाइसेंस आवंटन में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुईं। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस मामले में करोड़ों रुपये के कथित कैश किकबैक सिस्टम का इस्तेमाल किया गया।

आरोप है कि शराब आपूर्ति करने वाली कुछ कंपनियों ने डिस्टिलरीज के लिए फर्जी या बढ़ा-चढ़ाकर इनवॉइस तैयार किए और इसके जरिए कथित तौर पर अवैध लेनदेन किया गया। जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही हैं।

गौरतलब है कि सेंथिल बालाजी पहले भी कानूनी मामलों में घिर चुके हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भी उनके खिलाफ कार्रवाई की थी। हालांकि, मौजूदा TASMAC मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से उन्हें फिलहाल गिरफ्तारी से राहत मिल गई है।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद डीएमके नेताओं ने राहत की सांस ली है, जबकि विपक्षी दलों ने मामले की जांच को लेकर सरकार और जांच एजेंसियों पर सवाल उठाए हैं। फिलहाल जांच एजेंसियां मामले की आगे की जांच जारी रखेंगी और अदालत की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

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