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संजय राउत का केंद्र सरकार पर हमला, बोले- राहुल गांधी देश की भावना व्यक्त कर रहे

Shantanu Roy
30 July 2026 3:29 PM IST
संजय राउत का केंद्र सरकार पर हमला, बोले- राहुल गांधी देश की भावना व्यक्त कर रहे
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Maharashtra. महाराष्ट्र। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से उठाई गई इस्तीफे की मांग का समर्थन किया है। राउत ने कहा कि राहुल गांधी जो बातें कह रहे हैं, वे केवल उनकी व्यक्तिगत राय नहीं बल्कि देश के एक बड़े वर्ग की भावना को व्यक्त करती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में हुई कई बड़ी घटनाओं की जिम्मेदारी केंद्रीय गृह मंत्री के पद पर बैठे व्यक्ति की होती है और इस पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।
मीडिया से बातचीत के दौरान संजय राउत ने कहा कि राहुल गांधी द्वारा अमित शाह के इस्तीफे की मांग में कुछ भी गलत नहीं है। उनके अनुसार, लोकतंत्र में विपक्ष का दायित्व है कि वह सरकार से जवाब मांगे और जनता के मुद्दों को उठाए। राउत ने कहा कि राहुल गांधी देश की भावना को व्यक्त कर रहे हैं और इस विषय पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए।
राउत ने कहा कि उनका मानना है कि केंद्रीय गृह मंत्री को काफी पहले ही इस्तीफा दे देना चाहिए था। उन्होंने पुलवामा आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा कि उस घटना में 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे और इतने बड़े सुरक्षा चूक के लिए जिम्मेदारी तय होनी चाहिए थी। उन्होंने सवाल उठाया कि उस घटना की जवाबदेही किसकी थी और कहा कि गृह मंत्रालय की भूमिका पर भी चर्चा होनी चाहिए।
इसके साथ ही उन्होंने हाल ही में पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए भी सरकार पर निशाना साधा। राउत ने कहा कि जब देश में ऐसी बड़ी सुरक्षा संबंधी घटनाएं होती हैं तो उनकी जिम्मेदारी तय करना जरूरी होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मामलों में केंद्र सरकार को जवाब देना चाहिए।
शिवसेना यूबीटी सांसद ने जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के आंदोलन को बलपूर्वक समाप्त करने की कोशिश की गई। राउत ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग किया गया और इसकी पूरी जानकारी संबंधित पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हुआ है तो इसकी जिम्मेदारी भी केंद्रीय गृह मंत्री पर बनती है।
राउत ने कहा कि राहुल गांधी द्वारा अमित शाह के इस्तीफे की मांग केवल कांग्रेस की राजनीतिक मांग नहीं है, बल्कि देश के युवाओं की आवाज है। उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार युवाओं के मुद्दों को उठा रहा है और सरकार को इन सवालों का जवाब देना चाहिए। उनके अनुसार लोकतंत्र में जनता और विपक्ष की आवाज को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग करते हुए संजय राउत ने कहा कि यदि विपक्ष लगातार किसी मंत्री की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है तो प्रधानमंत्री को इस विषय पर विचार करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ जिस प्रकार का व्यवहार किया गया, वह लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं था। उन्होंने इस संदर्भ में अपनी राजनीतिक टिप्पणी करते हुए कहा कि विपक्ष का मानना है कि ऐसे मामलों में जवाबदेही तय होनी चाहिए।
इस दौरान राउत ने हाल ही में लोकसभा से पारित एंटी पेपर लीक बिल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि केवल नया कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनके अनुसार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुधारों की आवश्यकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा से जुड़ी विभिन्न संस्थाओं और विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत नहीं किया। राउत ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकना चाहती है तो उसे परीक्षा प्रणाली की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल सख्त कानून बना देने से तब तक अपेक्षित परिणाम नहीं मिलेंगे, जब तक परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की जाती।
उधर, केंद्र सरकार का कहना है कि एंटी पेपर लीक कानून का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और पेपर लीक जैसे अपराधों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है। सरकार का दावा है कि नए संशोधन के तहत दोषियों के खिलाफ कड़े दंड, अधिक जुर्माना, विशेष जांच तंत्र और फास्ट ट्रैक अदालतों जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं ताकि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके। संजय राउत के इन बयानों के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म होने की संभावना है। विपक्ष जहां सरकार से विभिन्न मुद्दों पर जवाबदेही की मांग कर रहा है, वहीं सरकार अपने फैसलों और नीतियों का बचाव कर रही है। आने वाले दिनों में संसद और राजनीतिक मंचों पर इन मुद्दों को लेकर बहस और तेज होने के आसार हैं।
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