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सहारनपुर मस्जिद विवाद UN तक पहुंचा, शहबाज शरीफ के बयान पर विकास त्यागी का पलटवार

jantaserishta.com
27 Sept 2026 3:05 PM IST
सहारनपुर मस्जिद विवाद UN तक पहुंचा, शहबाज शरीफ के बयान पर विकास त्यागी का पलटवार
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नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद हटाए जाने का विवाद अब अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच गया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 25 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में अपने संबोधन के दौरान भारत में धार्मिक नफरत और इस्लामोफोबिया का मुद्दा उठाया। उन्होंने सहारनपुर में करीब 150 साल पुरानी बताई जा रही मस्जिद को हटाए जाने की कार्रवाई का भी उल्लेख किया।
शहबाज शरीफ के बयान पर सहारनपुर मस्जिद मामले के शिकायतकर्ता और बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह मामला भारत की प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा है और पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।
शहबाज शरीफ ने UN में उठाया धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि दुनिया में इस्लामोफोबिया बढ़ रहा है और मुसलमानों को भेदभाव, नफरत तथा धार्मिक स्थलों पर हमलों जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने भारत में आरएसएस से जुड़ी हिंदुत्व विचारधारा को धार्मिक नफरत से जोड़ते हुए सहारनपुर की मस्जिद हटाए जाने की घटना को इसका उदाहरण बताया।
शहबाज शरीफ ने धार्मिक नफरत के खिलाफ वैश्विक स्तर पर कार्रवाई की जरूरत बताई। उनके भाषण में कश्मीर, फिलिस्तीन, इस्लामोफोबिया और भारत-पाकिस्तान संबंध समेत कई मुद्दे शामिल रहे।
विकास त्यागी बोले- मामला सरकारी जमीन से जुड़ा है
शहबाज शरीफ के बयान पर विकास त्यागी ने कहा कि सहारनपुर में हुई कार्रवाई किसी धार्मिक विवाद के आधार पर नहीं, बल्कि जमीन और निर्माण की वैधता से जुड़े प्रशासनिक मामले के रूप में हुई थी।
मामला सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद करीब 315 वर्ग मीटर जमीन पर बनी संरचना से संबंधित था। उपलब्ध अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, सरकारी पक्ष ने जमीन को कलेक्ट्रेट की सरकारी संपत्ति बताया था। मामले में सार्वजनिक परिसर से अनधिकृत कब्जा हटाने के कानून के तहत कार्रवाई शुरू हुई थी।
16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट ने मस्जिद प्रबंधन के खिलाफ बेदखली का आदेश दिया और करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति भी निर्धारित की। मस्जिद प्रबंधन ने इस आदेश को जिला अदालत में चुनौती दी, लेकिन 2 सितंबर को जिला जज ने अपील खारिज कर दी। इसके तीन दिन बाद 5 सितंबर को प्रशासन ने कलेक्ट्रेट परिसर में कार्रवाई की।
मस्जिद कमेटी ने हाईकोर्ट में दी चुनौती
मामला जिला अदालत के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट भी पहुंचा। मस्जिद से जुड़े पक्ष ने सिटी मजिस्ट्रेट के 16 जुलाई के आदेश और जिला अदालत के 2 सितंबर के फैसले को चुनौती दी। याचिका में दावा किया गया कि जमीन पर मस्जिद लंबे समय से मौजूद थी और कार्रवाई कानूनी अधिकार क्षेत्र के बाहर की गई।
11 सितंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा और 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति की वसूली पर अंतरिम रोक लगा दी। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर के लिए सूचीबद्ध की गई है। इसका मतलब है कि विवाद से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
विवाद के बीच दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे
विकास त्यागी का कहना है कि पाकिस्तान द्वारा इस मामले को संयुक्त राष्ट्र में धार्मिक उत्पीड़न के उदाहरण के तौर पर पेश करना उचित नहीं है। उनका तर्क है कि कार्रवाई प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रिया के बाद हुई।
दूसरी ओर, मस्जिद से जुड़े पक्ष ने अदालत में जमीन के अधिकार और मस्जिद के पुराने अस्तित्व को लेकर अलग दावे किए हैं। हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में इन्हीं कानूनी पहलुओं को चुनौती दी गई है।
इस पूरे मामले में फिलहाल दो स्तर की बहस चल रही है। एक तरफ संयुक्त राष्ट्र में धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक अधिकारों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी हुई है, जबकि दूसरी तरफ भारत में सहारनपुर की कार्रवाई से जुड़े जमीन, कब्जे और प्रशासनिक अधिकार के सवाल अदालतों में विचाराधीन हैं। हाईकोर्ट की आगे की कार्यवाही से मामले की कानूनी स्थिति पर और स्पष्टता आने की उम्मीद है।
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