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डॉलर के मुकाबले Rupee 4 पैसे मजबूत

Harrison
30 April 2026 9:46 PM IST
डॉलर के मुकाबले Rupee 4 पैसे मजबूत
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Mumbai मुंबई : विदेशी मुद्रा बाजार में गुरुवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मामूली मजबूती के साथ बंद हुआ। दिन के कारोबार में रुपया 4 पैसे बढ़कर 94.84 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। हालांकि, वैश्विक और घरेलू दबावों के कारण इसकी बढ़त सीमित रही।
कारोबारियों के अनुसार, कच्चे तेल की नरम कीमतों से रुपये को शुरुआती सपोर्ट मिला, जिससे घरेलू मुद्रा में थोड़ी मजबूती देखी गई। लेकिन दिन बढ़ने के साथ ही तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक अनिश्चितताओं ने इस बढ़त को सीमित कर दिया।
बाजार पर विदेशी निवेशकों की निकासी (FII outflows) का भी दबाव देखने को मिला, जिससे रुपये पर नकारात्मक असर पड़ा। लगातार विदेशी पूंजी की निकासी ने बाजार में डॉलर की मांग बढ़ा दी, जिससे रुपये की मजबूती सीमित रह गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर चल रहे तनाव, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, ने निवेशकों को सतर्क बना दिया है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महंगाई को लेकर चिंता भी बनी हुई है, जिसका असर उभरते बाजारों की मुद्राओं पर पड़ रहा है।
विदेशी मुद्रा डीलरों के अनुसार, दिनभर के कारोबार में रुपया एक सीमित दायरे में ही घूमता रहा। शुरुआती सत्र में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के कारण रुपये में हल्की तेजी देखी गई, लेकिन बाद में वैश्विक संकेतों ने इसे दबा दिया।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए कच्चे तेल की कीमतें बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से आयात बिल बढ़ता है, जिससे रुपये पर दबाव आता है।
इसके अलावा, वैश्विक बाजारों में डॉलर की मजबूती भी रुपये की दिशा को प्रभावित कर रही है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े मजबूत संकेतों के कारण डॉलर इंडेक्स में स्थिरता बनी हुई है, जिससे अन्य मुद्राओं पर दबाव पड़ रहा है।
बाजार विश्लेषकों का यह भी कहना है कि आने वाले दिनों में रुपये की दिशा काफी हद तक विदेशी निवेश प्रवाह, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी।
इस बीच, घरेलू शेयर बाजारों में भी सतर्कता का माहौल देखा गया, जिससे रुपये को अतिरिक्त समर्थन नहीं मिल सका। निवेशक फिलहाल बड़े फैसलों से बच रहे हैं और वैश्विक संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, रुपये में फिलहाल बड़ी तेजी या गिरावट की संभावना सीमित है, लेकिन वैश्विक घटनाओं में बदलाव आने पर इसमें उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है।
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