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आंखों को बार-बार मलने से जा सकती है रोशनी, जानिए इस आदत के खतरनाक प्रभाव
jantaserishta.com
26 Aug 2025 5:28 PM IST

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नई दिल्ली: आंखें न सिर्फ इस दुनिया को देखने का जरिया हैं, बल्कि ये हमारी भावनाओं का आईना भी होती हैं। जब हम खुश होते हैं, दुखी होते हैं, थक जाते हैं या नींद से भर जाते हैं, तो आंखें अपने आप बहुत कुछ कह जाती हैं। ऐसे ही थकान, जलन या खुजली के वक्त हम अक्सर बिना सोचे-समझे अपनी आंखों को मलने लगते हैं। यह काम उस वक्त हमें राहत देने वाला लग सकता है, लेकिन यह आदत हमारी आंखों पर बुरा असर डालती है।
आंखों को बार-बार मलना खतरनाक आदत साबित हो सकती है। यह आदत धीरे-धीरे हमारी आंखों को खराब कर सकती है। यह एक ऐसी समस्या है जो खासतौर पर बच्चों, युवाओं और उन लोगों में ज्यादातर देखी जाती है जो लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहते हैं।
अमेरिकन नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की रिसर्च के मुताबिक, आंखों को बार-बार मलने से संक्रमण का खतरा बढ़ता है। हमारे हाथ दिनभर कई चीजों को छूते हैं, दरवाजों की कुंडी से लेकर मोबाइल फोन तक। इन पर बैक्टीरिया होते हैं, जो हमारी आंखों तक पहुंच जाते हैं, जब हम बिना हाथ धोए उन्हें मलते हैं। इससे आंखों में जलन, लालिमा, पानी आना और यहां तक कि कंजक्टिवाइटिस हो सकता है। अगर यह आदत बनी रही तो आंखों की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली भी कमजोर हो जाती है और छोटी-छोटी चीजों से भी आंखें प्रभावित होने लगती हैं।
इसके अलावा, इस आदत से आंखों की सतह यानी कॉर्निया पर भी बुरा असर बढ़ सकता है। कॉर्निया काफी नाजुक होती है। जब हम आंखों को जोर से या बार-बार मलते हैं, तो इससे कॉर्निया पर छोटे-छोटे घाव या खरोंच पड़ सकते हैं, जिसे मेडिकल की भाषा में 'कॉर्नियल एब्रेशन' कहा जाता है। यह स्थिति न केवल दर्दनाक होती है, बल्कि इससे रोशनी में देखने में परेशानी, धुंधलापन और लगातार जलन हो सकती है। अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए, तो यह आगे चलकर संक्रमण का रूप भी ले सकता है।
ग्लूकोमा भी आंखों को बार-बार मलने की आदत से उभर सकता है। ग्लूकोमा एक ऐसी बीमारी है जिसमें आंखों की ऑप्टिक नर्व धीरे-धीरे खराब होने लगती है। बार-बार आंखों को मलने से आंखों में दबाव बढ़ जाता है और अगर यह दबाव लंबे समय तक बना रहे, तो ग्लूकोमा का खतरा पैदा हो सकता है। यह बीमारी धीरे-धीरे नजर को खत्म करती है और अगर सही समय पर इलाज न मिले, तो इंसान अपनी रोशनी हमेशा के लिए खो सकता है।
आंखों के आसपास की त्वचा बहुत नाजुक और पतली होती है। जब हम उन्हें बार-बार मलते हैं, तो वहां की रक्त नलिकाएं क्षतिग्रस्त हो सकती हैं, जिससे डार्क सर्कल गहरे हो जाते हैं। साथ ही, स्किन की लचक खत्म होने लगती है, जिसकी वजह से झुर्रियां समय से पहले दिखाई देने लगती हैं। यह आदत न सिर्फ आंखों की सेहत, बल्कि चेहरे की सुंदरता को भी खराब कर सकती है।
अगर किसी को पहले से चश्मा है या फिर आंखों की कोई समस्या है, तो आंख मलने से यह और बढ़ सकती है। बार-बार रगड़ने से कॉर्निया का आकार बदल सकता है, जिससे चश्मे का नंबर तेजी से बढ़ सकता है। कई मामलों में यह आदत कराटोकोनस जैसी गंभीर बीमारी को जन्म दे सकती है, जिसमें कॉर्निया पतला और शंकु जैसा हो जाता है, और इसके कारण व्यक्ति को हर चीज धुंधली दिखने लगती है।
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