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ईरान से तेल कार्गो के डायवर्जन की खबरें गलत, सरकार ने दावों को 'तथ्यात्मक रूप से गलत' और भ्रामक बताया

jantaserishta.com
4 April 2026 3:24 PM IST
ईरान से तेल कार्गो के डायवर्जन की खबरें गलत, सरकार ने दावों को तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक बताया
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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने शनिवार को उन खबरों और सोशल मीडिया दावों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि भुगतान संबंधी समस्याओं के कारण ईरान का कच्चा तेल भारत के वाडिनार से चीन भेज दिया गया। सरकार ने इन दावों को 'तथ्यात्मक रूप से गलत' और भ्रामक बताया है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि हाल ही में आई रिपोर्ट्स, जिनमें कहा गया कि भारत को भुगतान संबंधी समस्याओं के कारण ईरान से आने वाले तेल की एक खेप को नुकसान हुआ, पूरी तरह गलत हैं।
सरकार ने कहा कि भारत 40 से ज्यादा देशों से कच्चा तेल आयात करता है और तेल कंपनियों को अपने व्यावसायिक जरूरतों के अनुसार किसी भी सप्लायर से तेल खरीदने की पूरी स्वतंत्रता होती है। मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, "ईरानी कच्चे तेल के एक कार्गो को भारत के वाडिनार बंदरगाह से 'भुगतान संबंधी समस्याओं' के कारण चीन की ओर मोड़े जाने की खबरें और सोशल मीडिया पोस्ट तथ्यात्मक रूप से पूरी तरह गलत हैं।"
पोस्ट में आगे कहा गया है, "भारत 40 से अधिक देशों से कच्चे तेल का आयात करता है, जिसमें कंपनियों को व्यावसायिक विचारों के आधार पर विभिन्न स्रोतों और भौगोलिक क्षेत्रों से तेल प्राप्त करने की पूरी छूट है।" यह स्पष्टीकरण उन रिपोर्ट्स के बाद आई है, जिनमें दावा किया गया था कि अमेरिकी प्रतिबंधों के तहत प्रतिबंधित एक टैंकर, जिसका नाम 'पिंग शुन' है और जो ईरानी कच्चे तेल को ला रहा था, ने गुजरात के वाडिनार से अपना मार्ग बदलकर चीन के डोंगयिंग की ओर कर लिया।
शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, जहाज पहले भारत की ओर आ रहा था, लेकिन बाद में उसने अपनी मंजिल बदल ली, जिससे यह अटकलें लगाई जाने लगीं कि भुगतान की समस्या के कारण ऐसा हुआ। कुछ बाजार विश्लेषकों ने यह भी कहा था कि सख्त भुगतान शर्तें इस बदलाव की वजह हो सकती हैं। हालांकि, सरकार ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि ईरान से तेल आयात में कोई भुगतान संबंधी बाधा नहीं है और इस तरह की खबरें भ्रामक हैं।
मंत्रालय ने यह भी भरोसा दिलाया कि मध्य पूर्व में चल रहे सप्लाई संकट के बावजूद भारतीय रिफाइनरियों ने आने वाले महीनों के लिए कच्चे तेल की जरूरत पहले ही सुनिश्चित कर ली है, जिसमें ईरान से सप्लाई भी शामिल है।
मंत्रालय ने कहा, "तेल व्यापार के तरीके को समझे बिना जहाज के रूट बदलने को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। बिल ऑफ लैंडिंग में अक्सर संभावित गंतव्य लिखा होता है और समुद्र में जहाज अपनी मंजिल व्यापारिक जरूरतों और ऑपरेशनल कारणों से बदल सकते हैं।"
एलपीजी सप्लाई को लेकर आई अलग-अलग खबरों पर भी सरकार ने कहा कि वे रिपोर्टें गलत थीं। सरकार ने पुष्टि की कि 'सी बर्ड' नाम का एलपीजी जहाज, जो करीब 44 हजार मीट्रिक टन ईरानी एलपीजी लेकर आया था, 2 अप्रैल को मैंगलोर पहुंच चुका है और फिलहाल अपना माल उतार रहा है।
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