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जलभराव और छायादार सड़कों की मांगी रिपोर्ट

Shantanu Roy
16 May 2026 2:37 PM IST
जलभराव और छायादार सड़कों की मांगी रिपोर्ट
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Shimla. शिमला। हिमाचल प्रदेश में बार-बार टूट रही सड़कों और जलभराव की गंभीर समस्या से निपटने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) ने बड़ा कदम उठाया है। विभाग के प्रमुख अभियंता ने प्रदेशभर के मुख्य अभियंताओं, अधीक्षण अभियंताओं और फील्ड अधिकारियों से उन सभी सड़कों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जहां जलभराव की स्थिति अधिक रहती है और धूप न पहुंचने के कारण सड़कें जल्दी खराब हो जाती हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि विशेष रूप से छायादार क्षेत्रों और उन स्थानों पर ध्यान दिया जाएगा, जहां बारिश के बाद पानी लंबे समय तक जमा रहता है। ऐसे स्थानों पर सड़कों की स्थिति तेजी से खराब होती है और बार-बार मरम्मत की जरूरत पड़ती है, जिससे विभाग पर अतिरिक्त खर्च का बोझ बढ़ता है। इसी समस्या के स्थायी समाधान के लिए अब आधुनिक तकनीक अपनाने का निर्णय लिया गया है।
प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर चिन्हित स्थानों पर चरणबद्ध तरीके से सीजीबीएम (सीमेंट ग्राउटिंग बिटुमिनस मैकेडम) तकनीक के तहत सड़क मरम्मत कार्य किया जाएगा। यह तकनीक केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान से प्रमाणित बताई जा रही है और इसे अधिक टिकाऊ और मजबूत माना जाता है। विभाग का मानना है कि इस तकनीक के उपयोग से जलभराव और गड्ढों की समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह पहले ही इस दिशा में संकेत दे चुके हैं कि प्रदेश की सड़कों को अधिक टिकाऊ बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ाया जाएगा। विभाग के प्रमुख अभियंता ई. एनपी सिंह ने बताया कि सभी फील्ड अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं और रिपोर्ट मिलने के बाद प्राथमिकता के आधार पर काम शुरू किया जाएगा।
विभाग ने पहले ही पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शोघी-मेहली सड़क पर इस तकनीक का उपयोग शुरू किया था, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। परीक्षण में पाया गया कि सीजीबीएम तकनीक से बनी सड़कें अधिक समय तक खराब नहीं होतीं और भारी बारिश के बावजूद उनकी सतह सुरक्षित रहती है। अधिकारियों के अनुसार, इस तकनीक के लागू होने से न केवल सड़कों की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि यात्रियों को भी गड्ढों और जलभराव की समस्या से राहत मिलेगी। विभाग का लक्ष्य है कि आने वाले समय में राज्य की प्रमुख सड़कों को इसी तकनीक के तहत मजबूत बनाया जाए ताकि रखरखाव का खर्च कम हो और सड़कें लंबे समय तक टिकाऊ बनी रहें।
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