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रविदास मेहरोत्रा का दावा- यूपी में सपा की आंधी, BJP ने खोया जनता का समर्थन

SHIDDHANT
30 Sept 2026 10:21 PM IST
रविदास मेहरोत्रा का दावा- यूपी में सपा की आंधी, BJP ने खोया जनता का समर्थन
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उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। इसी बीच समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ विधायक रविदास मेहरोत्रा ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए दावा किया है कि प्रदेश में समाजवादी पार्टी के पक्ष में माहौल बन रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में सपा की “जबरदस्त आंधी” चल रही है और जनता ने सपा की सरकार बनाने का मन बना लिया है।
रविदास मेहरोत्रा ने दावा किया कि भाजपा ने जनता का समर्थन खो दिया है। उनके मुताबिक, प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में भाजपा के विधायकों को लेकर लोगों में नाराजगी है और यह असंतोष आने वाले चुनाव में राजनीतिक असर डाल सकता है। हालांकि, ये दावे सपा विधायक के राजनीतिक आकलन हैं और इनके आधार पर चुनावी नतीजे का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
लखनऊ मध्य विधानसभा क्षेत्र से सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा लंबे समय से प्रदेश की राजनीति में सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच सपा और भाजपा दोनों ही अपने संगठन और चुनावी रणनीति को मजबूत करने में जुटी हैं। हालिया राजनीतिक गतिविधियों में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी पार्टी के संगठनात्मक अभियान को आगे बढ़ाया है।
मेहरोत्रा के बयान में मुख्य तौर पर भाजपा विधायकों के खिलाफ कथित जन असंतोष और सपा के पक्ष में बताए जा रहे राजनीतिक माहौल का जिक्र रहा। उन्होंने कहा कि जनता बदलाव चाहती है और आगामी विधानसभा चुनाव में इसका असर देखने को मिलेगा। दूसरी ओर, भाजपा की ओर से भी सपा की पिछली सरकार के कार्यकाल और उसके शासन को लेकर लगातार राजनीतिक सवाल उठाए जा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव अभी भविष्य में है, इसलिए फिलहाल किसी दल के पक्ष में जनसमर्थन या चुनावी परिणाम को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है। विभिन्न दल अपने-अपने दावों और मुद्दों के साथ जनता के बीच पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं।
रविदास मेहरोत्रा का यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रदेश में चुनावी माहौल को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो रही है। सपा जहां सरकार की नीतियों और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर सवाल उठा रही है, वहीं भाजपा अपने शासन और पिछली सपा सरकार के कार्यकाल को चुनावी बहस का हिस्सा बना रही है। आने वाले महीनों में दोनों दलों के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है।
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