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भोलेनाथ के परम भक्त रावण का बैजनाथ में होता है सम्मान

Shantanu Roy
20 Oct 2026 4:22 PM IST
भोलेनाथ के परम भक्त रावण का बैजनाथ में होता है सम्मान
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Kangra. कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित शिवनगरी बैजनाथ की धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं इसे देश के अन्य धार्मिक स्थलों से अलग पहचान दिलाती हैं। बैजनाथ में रावण दहन न किए जाने के पीछे एक प्राचीन धार्मिक किंवदंती प्रचलित है। गौर हो कि बैजनाथ मंदिर भगवान शिव का धाम है और इसे 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। कहा जाता है कि रावण ने यहीं पर कठोर तपस्या करके शिव जी से वरदान लिया था। ऐसे में जिस जगह रावण ने शिव की भक्ति की हो, वहां उसके पुतले को जलाना शिव का
अपमान
माना जाता है। एक और मान्यता के अनुसार जब बैजनाथ मंदिर बन रहा था, तब रावण ने शिवलिंग को लंका ले जाने की कोशिश की थीए, लेकिन शिवजी ने यहीं पर अपना स्थान बना लिया। इसलिए यहां के पुजारी और स्थानीय लोग रावण से बैर नहीं रखते, बल्कि उसे एक महान विद्वान और शिवभक्त मानते हैं। अन्य कथा के अनुसार रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए इसी पवित्र भूमि पर कठोर तपस्या की थी। भगवान शिव के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा और भक्ति प्रकट करने के लिए उसने अपने दसों शीश अर्पित कर दिए थे। रावण की इस कठिन तपस्या और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे दर्शन दिए और मनवांछित वरदान मांगने को कहा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रावण की इसी कठोर साधना के कारण बैजनाथ की भूमि का संबंध उसकी शिवभक्ति से जुड़ा हुआ है। यही वजह बताई जाती है कि भगवान शिव की नगरी बैजनाथ में दशहरे के दिन रावण का पुतला जलाने की परंपरा नहीं निभाई जाती। शिव नगरी बैजनाथ में रावण दहन न होना यहां की विशिष्ट धार्मिक मान्यताओं और लोकपरंपराओं को दर्शाता है। यहां की आस्था में रावण का एक ऐसा पक्ष भी सामने आता है ए जो उसे भगवान शिव के अनन्य भक्त के रूप में प्रस्तुत करता है। यही कारण है कि दशहरे के अवसर पर बैजनाथ में इस परंपरा से दूरी बनाए रखी जाती है। बैजनाथ की यह मान्यता दर्शाती है कि भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग रूप धारण करती हैं। कहीं दशहरा रावण दहन के माध्यम से मनाया जाता है, तो कहीं स्थानीय आस्था, पौराणिक कथाओं और सदियों पुरानी मान्यताओं को विशेष महत्त्व दिया जाता है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा प्रचलित है कि कई वर्ष पहले कुछ लोगों ने बैजनाथ में रावण दहन करने का प्रयास किया था। बताया जाता है कि इन प्रयासों के दौरान संबंधित लोगों के साथ दुर्घटनाएं हो गईं। इसके बाद से किसी ने भी यहां रावण दहन की परंपरा शुरू करने की पहल नहीं की। हालांकि इन घटनाओं के संबंध में स्वतंत्र रूप से प्रमाणित विवरण उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए इन्हें स्थानीय मान्यता और जनचर्चा के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
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