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अस्पतालों में दिखेगा रेट कार्ड: केंद्र ने राज्यों को दिए निर्देश

Tara Tandi
12 Oct 2026 3:43 PM IST
अस्पतालों में दिखेगा रेट कार्ड: केंद्र ने राज्यों को दिए निर्देश
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नई दिल्ली: केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने सोमवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) से कहा कि वे यह पक्का करें कि क्लिनिकल संस्थान (अस्पताल और क्लीनिक) हेल्थकेयर सेवाओं और सुविधाओं के लिए लिए जाने वाले रेट्स को प्रमुखता से प्रदर्शित करें। इस कदम का मकसद पारदर्शिता, जवाबदेही और मरीज़-केंद्रित हेल्थकेयर सेवा को बेहतर बनाना है।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को लिखे एक पत्र में, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने अधिकारियों से कहा कि वे लागू नियमों के पालन की समीक्षा करें और ज़रूरी कदम उठाएं ताकि हेल्थकेयर खर्चों की जानकारी मरीज़ों और उनके साथ आने वाले लोगों को साफ़ तौर पर दिखे और आसानी से मिल सके।
मंत्रालय ने कहा कि इलाज के खर्चों को पारदर्शी तरीके से प्रदर्शित करने से मरीज़ों और उनके परिवारों को मेडिकल देखभाल में होने वाले संभावित खर्च को समझने में मदद मिलेगी, जिससे वे सही जानकारी के आधार पर फ़ैसले ले सकेंगे और अपने फ़ाइनेंस की बेहतर योजना बना सकेंगे।
मंत्रालय ने यह भी कहा कि ज़्यादा पारदर्शिता से बिलिंग को लेकर भ्रम कम हो सकता है, विवाद कम हो सकते हैं और हेल्थकेयर सिस्टम में जनता का भरोसा मज़बूत हो सकता है।
आधिकारिक बयान के अनुसार, "पारदर्शिता, जवाबदेही और मरीज़-केंद्रित हेल्थकेयर सेवा को मज़बूत करने की दिशा में एक अहम कदम के तौर पर, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) से कहा है कि वे क्लिनिकल संस्थानों द्वारा दी जाने वाली सेवाओं और सुविधाओं के लिए लिए जाने वाले रेट्स को प्रमुखता से प्रदर्शित करना पक्का करें।"
इस पत्र में क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स (रजिस्ट्रेशन और रेगुलेशन) एक्ट, 2010 और क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स (सेंट्रल गवर्नमेंट) रूल्स, 2012 का ज़िक्र किया गया है। इन नियमों के तहत, जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह कानून लागू है, वहां क्लिनिकल संस्थानों को सभी सेवाओं और सुविधाओं के लिए शुल्क को ऐसी जगह प्रदर्शित करना ज़रूरी है जहां वे आसानी से दिखें। मरीज़ों और उनके साथ आने वाले लोगों के फ़ायदे के लिए रेट्स अंग्रेज़ी और स्थानीय भाषा, दोनों में प्रदर्शित किए जाने चाहिए।
मंत्रालय ने कहा कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में केंद्रीय कानून लागू नहीं है, वे अपने-अपने नियमों के तहत हेल्थकेयर सुविधाओं को रेगुलेट करते हैं, और उनमें से कई में सेवा शुल्क प्रदर्शित करने से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं।
यह बताते हुए कि स्वास्थ्य एक राज्य का विषय है, स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि संबंधित नियमों को लागू करने और उनका पालन कराने की ज़िम्मेदारी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के अधिकारियों की है।
मंत्रालय ने भारत में इलाज कराने वाले अंतरराष्ट्रीय मरीज़ों के लिए भी ज़्यादा पारदर्शिता की मांग की है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा गया है कि वे अस्पतालों और हेल्थकेयर संस्थानों को मेडिकल या आयुष वीज़ा पर आने वाले विदेशी मरीज़ों के लिए ऑफ़र किए जाने वाले पैकेज रेट्स को प्रमुखता से प्रदर्शित करने के लिए प्रोत्साहित करें। मंत्रालय के अनुसार, ऐसे उपायों से विदेशी मरीज़ सही जानकारी के आधार पर फ़ैसले ले पाएँगे, कीमतों से जुड़ी शिकायतें कम होंगी और मेडिकल व आयुष देखभाल के लिए भारत की पसंदीदा जगह के तौर पर स्थिति और मज़बूत होगी।
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