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भारत में दिखा रमजान का चांद, कल से रखेंगे रोजा

Shantanu Roy
18 Feb 2026 8:37 PM IST
भारत में दिखा रमजान का चांद, कल से रखेंगे रोजा
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New Delhi. नई दिल्ली। इस्लामिक कैलेंडर का नवां महीना रमजान (रमदान) वर्ष 2026 में भारत में 19 फरवरी से शुरू हो रहा है। बुधवार शाम को देश के विभिन्न हिस्सों में रमजान का चांद दिखाई देने के बाद मुस्लिम समुदाय में खुशी का माहौल है। चांद दिखने की पुष्टि के साथ ही 19 फरवरी, गुरुवार को पहला रोजा रखा जाएगा। रमजान का महीना मुसलमानों के लिए अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक महत्व का समय माना जाता है, जिसमें रोजा, नमाज, दुआ, कुरआन की तिलावत और इबादत को विशेष प्राथमिकता दी जाती है। रमजान को रहमत, बरकत और हिदायत का महीना कहा जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार पवित्र ग्रंथ कुरआन का अवतरण इसी महीने में हुआ था, इसलिए इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। इस पूरे महीने बालिग (वयस्क) मुसलमानों के लिए रोजा रखना अनिवार्य माना गया है, हालांकि बीमारी, यात्रा या अन्य विशेष परिस्थितियों में शरीयत के अनुसार छूट के प्रावधान भी हैं। रोजा आत्मसंयम, अनुशासन और आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक माना जाता है, जिसमें व्यक्ति सूर्योदय से सूर्यास्त तक भोजन और पानी से परहेज करते हुए इबादत में समय व्यतीत करता है। रमजान के दौरान सहरी (सुबह रोजा शुरू करने से पहले का भोजन) और इफ्तार (शाम रोजा खोलने का समय) का विशेष महत्व होता है। विभिन्न शहरों में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय के अनुसार सहरी और इफ्तार के समय अलग-अलग निर्धारित होते हैं।

पहले रोजे के अवसर पर प्रमुख शहरों के सहरी-इफ्तार समय इस प्रकार हैं:
दिल्ली (19 फरवरी 2026):
सहरी खत्म – सुबह 5:20 बजे
इफ्तार – शाम 6:15 बजे

मुंबई (19 फरवरी 2026):
सहरी खत्म – सुबह 5:35 बजे
इफ्तार – शाम 6:35 बजे

लखनऊ (19 फरवरी 2026):
सहरी खत्म – सुबह 5:10 बजे
इफ्तार – शाम 6:05 बजे

हैदराबाद (19 फरवरी 2026):
सहरी खत्म – सुबह 5:25 बजे
इफ्तार – शाम 6:25 बजे

कोलकाता (19 फरवरी 2026):
सहरी खत्म – सुबह 4:55 बजे
इफ्तार – शाम 5:50 बजे

पटना (19 फरवरी 2026):
सहरी खत्म – सुबह 5:00 बजे
इफ्तार – शाम 5:55 बजे

जयपुर (19 फरवरी 2026):
सहरी खत्म – सुबह 5:30 बजे
इफ्तार – शाम 6:20 बजे

धार्मिक विद्वानों के अनुसार, रमजान का महीना केवल उपवास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि, दान-पुण्य और सामाजिक सद्भाव का भी समय है। इस दौरान जकात और सदका (दान) देने की परंपरा निभाई जाती है, जिससे जरूरतमंदों की सहायता हो सके। मस्जिदों में विशेष तरावीह नमाज अदा की जाती है, जिसमें कुरआन की तिलावत की जाती है। रमजान के आगमन के साथ ही बाजारों और मस्जिदों में रौनक बढ़ गई है। खजूर, फलों, सेवरी और अन्य इफ्तार सामग्रियों की खरीदारी तेज हो गई है। समुदाय के लोग एक-दूसरे को रमजान की मुबारकबाद देते हुए इबादत और संयम के इस पवित्र महीने का स्वागत कर रहे हैं।
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