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Delhi दिल्ली: Rajnath Singh ने जर्मनी दौरे के दौरान ‘आत्मनिर्भर भारत’ को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ एक प्रोक्योरमेंट (खरीद) प्रोग्राम नहीं, बल्कि मिलकर निर्माण, विकास और नवाचार का एक व्यापक दृष्टिकोण है। जर्मनी की राजधानी Berlin में जर्मन संसद की रक्षा और सुरक्षा संबंधी स्थायी समिति को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने भारत और जर्मनी के बीच रक्षा औद्योगिक सहयोग को और मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के डिफेंस इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम के बीच साझेदारी से वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना किया जा सकता है।
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आज दुनिया तेजी से बदलते सुरक्षा खतरों का सामना कर रही है। नई तकनीकों के उभरने से सुरक्षा परिदृश्य अधिक जटिल और आपस में जुड़ा हुआ हो गया है। ऐसे में देशों को पारंपरिक सोच से आगे बढ़कर नए और लचीले दृष्टिकोण अपनाने होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के जरिए न केवल अपनी रक्षा क्षमता को मजबूत कर रहा है, बल्कि वैश्विक साझेदारों के साथ सहयोग के नए अवसर भी पैदा कर रहा है।
यह पहल विदेशी कंपनियों और मित्र देशों को भारत के साथ मिलकर रक्षा उत्पादन और तकनीकी विकास में भागीदारी का आमंत्रण देती है। राजनाथ सिंह ने जर्मनी के साथ तकनीकी सहयोग, अनुसंधान और संयुक्त उत्पादन के क्षेत्रों में संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि दोनों देश मिलकर वैश्विक शांति और स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। यह दौरा भारत-जर्मनी रक्षा संबंधों को नई दिशा देने और रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
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