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जल्द नीतीश कुमार से मिलेंगे राहुल गांधी, 23 जून को होगी विपक्षी दलों की बैठक

Shantanu Roy
7 Jun 2023 6:33 PM IST
जल्द नीतीश कुमार से मिलेंगे राहुल गांधी, 23 जून को होगी विपक्षी दलों की बैठक
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जानिए क्या है इन दलों की राजनीति
पटना। बिहार की राजधानी पटना में होने वाली विपक्षी दलों की बैठक एक बार फिर से टल गई है. पहले ये बैठक 12 जून 2023 को होने वालीथी लेकिन इसे 23 जून किया गया है. जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस कर विपक्षी दलों की होने वाली बैठक के बारे में पूरी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि सभी विपक्षी दलों से मंजूरी मिलने के बाद 23 जून 2023 की तिथि बैठक के लिए निर्धारित की गई है. बैठक को अखिलेश यादव, राहुल गांधी समेत तमाम विपक्षी दल के नेताओं द्वारा मंजूरी दी गई है. 12 जून 2023 को विपक्षी दलों की बैठक को टलने के पीछे कांग्रेस नेता राहुल गांधी का बैठक में शामिल ना होना बताया जा रहा था. अब कहा जा रहा है कि 23 जून 2023 को राहुल गांधी भी बैठक में शामिल होंगे. बता दें कि लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर बिहार के सीएम नीतीश कुमार काफी पहले से सक्रिय हो चुके हैं. वह विपक्षी दलों को एकजुट करने का प्रयास लगातार कर रहे हैं. सीएम नीतीश कुमार अबतक कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (आप),और वाम दलों के अलावा कई क्षेत्रीय क्षत्रपों से बातचीत की पहल की है. नीतीश ने राहुल और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, पश्चिम बंगाल की सीएम एवं तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी तथा एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार समेत तमाम विपक्षी दलों के साथ अलग-अलग बैठकें कर चुके हैं.
बेशक राहुल गांधी के लिए विपक्षी दलों की बैठक को टाला जा रहा है लेकिन कांग्रेस इस बात से नाराज है कि इसमें टीएमसी को क्यों बुलाया गया है? पश्चिम बंगाल में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने एक कदम आगे बढ़ते हुए दावा किया कि 12 जून की बैठक का जो भी परिणाम हो, कांग्रेस पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का विरोध जारी रखेगी. उन्होंने कहा, पश्चिम बंगाल में हमारा आंदोलन भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ है और यह जारी रहेगा. तृणमूल कांग्रेस वास्तव में विपक्षी गठबंधन में दरार पैदा करने के लिए भाजपा का मोहरा है. माकपा की केंद्रीय समिति के सदस्य सुजान चक्रवर्ती ने कहा कि हालांकि भाजपा के खिलाफ सभी विपक्षी ताकतों को एकजुट करने की यह एक अच्छी पहल है, लेकिन सवाल यह है कि क्या तृणमूल कांग्रेस पर विश्वास किया जा सकता है. उन्होंने कहा, तृणमूल कांग्रेस ने अप्रत्यक्ष रूप से भारत के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों में भाजपा की मदद की. संकट के समय में, तृणमूल कांग्रेस ने हमेशा प्रधानमंत्री मोदी को गुप्त रूप से समर्थन दिया है. माकपा के राज्यसभा सदस्य और कलकत्ता हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता बिकास रंजन भट्टाचार्य ने कहा कि एक महागठबंधन की जरूरत है और केवल उन राजनीतिक ताकतों को इसमें शामिल किया जाना चाहिए जो भाजपा का विरोध करे. उन्होंने कहा, बीजेपी हमेशा विपक्षी मोर्चे को भीतर से खत्म करने की कोशिश करेगी. ऐसे में तृणमूल कांग्रेस को शामिल करना एक अच्छा कदम नहीं होगा. बल्कि, पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चा और कांग्रेस के बीच आपसी समझ के मॉडल का राष्ट्रीय स्तर पर पालन किया जाना चाहिए.
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