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Delhi दिल्ली। हलाल नियंत्रण मंच ने हलाल प्रमाणन व्यवस्था को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। दिल्ली में आयोजित प्रेसवार्ता में मंच के प्रवक्ता, उद्योगपति एवं समाजसेवी हरिंदर सिक्का और सेवानिवृत्त न्यायाधीश पवन कुमार ने दावा किया कि हलाल प्रमाणन के कारण पशु वध और मांस व्यापार से जुड़े कुछ हिंदू और सिख समुदाय के लोगों के रोजगार पर प्रतिकूल असर पड़ा है। मंच ने हलाल प्रमाणन की व्यवस्था और इससे प्राप्त होने वाली फीस के इस्तेमाल की जांच की मांग की।
हरिंदर सिक्का ने दावा किया कि हलाल व्यवस्था पहले मुख्य रूप से मांस तक सीमित थी, लेकिन बाद में इसका दायरा बढ़ता गया। उन्होंने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों पर भी आरोप लगाए कि उनके कार्यकाल में APEDA के माध्यम से मांस निर्यात से संबंधित नियमों में हलाल प्रमाणन को बढ़ावा मिला। मंच का दावा है कि इससे गैर-हलाल पद्धति से जुड़े कारोबारियों के सामने रोजगार संबंधी समस्याएं पैदा हुईं।
सिक्का ने रेलवे, एयरलाइंस और होटलों में हलाल मांस की खरीद को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सिख धर्म में ‘कुठा’ मांस को लेकर धार्मिक निषेध है और उपभोक्ताओं को खाद्य पदार्थों के बारे में स्पष्ट जानकारी तथा विकल्प उपलब्ध होना चाहिए।
प्रेसवार्ता में हलाल प्रमाणन जारी करने वाली कुछ संस्थाओं और उनके द्वारा वसूली जाने वाली फीस पर भी सवाल उठाए गए। मंच के प्रतिनिधियों ने इस धन के इस्तेमाल को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए, हालांकि इन दावों के समर्थन में प्रेसवार्ता में बताए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं रखी गई।
सेवानिवृत्त न्यायाधीश पवन कुमार ने कहा कि हलाल नियंत्रण मंच इस मुद्दे को केंद्र और राज्य सरकारों के संबंधित मंत्रियों तथा प्रशासनिक अधिकारियों के सामने उठा रहा है। उन्होंने कहा कि मंच हलाल प्रमाणन व्यवस्था में पारदर्शिता और सरकारी निगरानी की मांग जारी रखेगा। प्रेसवार्ता में कांग्रेस और मुस्लिम संगठनों को लेकर भी कई आरोप लगाए गए। संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं होने के कारण इन दावों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
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