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पंजाब राजभवन का नाम बदला, अब होगा ‘लोक भवन

SHIDDHANT
4 Dec 2025 11:06 PM IST
पंजाब राजभवन का नाम बदला, अब होगा ‘लोक भवन
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Punjab पंजाब: राजभवन का नाम अब बदलकर ‘लोक भवन, पंजाब’ कर दिया गया है। यह घोषणा राज्यपाल ने केंद्रीय गृह मंत्रालय, भारत सरकार के आदेश के बाद की है। मंत्रालय ने अपने पत्र क्रमांक 7/10/2025 (Part)-M&G, दिनांक 25 नवंबर, 2025 के माध्यम से इस बदलाव के संबंध में सूचित किया था। राज्यपाल ने इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। पंजाब राजभवन के अंडर सेक्रेटरी भीम साईं गर्ग ने इस आदेश की जानकारी दी और बताया कि अब सभी सरकारी दस्तावेज, आमंत्रण पत्र, वेबसाइट और प्रशासनिक पत्राचार में पुराने नाम के स्थान पर ‘लोक भवन, पंजाब’ का प्रयोग अनिवार्य होगा।
राज्यपाल के इस फैसले के पीछे उद्देश्य प्रतीत होता है कि प्रशासनिक भवन को जनता के लिए अधिक सुलभ और पारदर्शी रूप में प्रस्तुत किया जा सके। इससे यह संदेश जाता है कि राज्य का प्रमुख सरकारी भवन केवल उच्च पदस्थ अधिकारियों या औपचारिक प्रशासनिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह आम जनता और उनके हितों को प्राथमिकता देने वाला स्थल माना जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के नाम परिवर्तन प्रतीकात्मक रूप से लोकतांत्रिक मूल्यों और जनता के प्रति उत्तरदायित्व को दर्शाते हैं। ‘राज भवन’ शब्द
ऐतिहासिक
रूप से शाही और राजकीय प्रतीक के रूप में प्रयोग होता रहा है, जबकि ‘लोक भवन’ का नया नाम जनता केंद्रित प्रशासन और पारदर्शिता का प्रतीक माना जाएगा।
इस बदलाव के बाद सरकारी मीडिया, प्रेस रिलीज, उद्घाटन समारोह और अन्य सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी नया नाम प्रयुक्त किया जाएगा। राज्य सरकार ने सभी विभागों को आदेश दिया है कि वे अपने आधिकारिक पत्राचार, वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तुरंत बदलाव लागू करें। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से प्राप्त नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया गया है कि यह निर्णय सरकार की लोकतांत्रिक और प्रशासनिक सुधार नीति के अनुरूप है। मंत्रालय ने राज्यपाल को सूचित किया कि पुराने नाम का उपयोग अब मान्य नहीं होगा और सभी आवश्यक बदलाव तुरंत किए जाएं।
पंजाब की जनता और राजनीतिक विशेषज्ञों ने इस निर्णय को सकारात्मक माना है। उनका कहना है कि यह कदम शासन और जनता के बीच दूरी कम करने और सरकारी संस्थाओं को जनता के प्रति अधिक उत्तरदायी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके अलावा, कई सामाजिक संगठनों ने इसे जनसुलभ प्रशासन और पारदर्शी शासन का प्रतीक बताया। राज्यपाल के इस निर्णय से यह संकेत भी मिलता है कि सरकार जनता के हितों को अधिक प्राथमिकता देने के लिए प्रतिबद्ध है।
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