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सचिन पायलट की चली तो जल्द आ सकता है कांग्रेस का फैसला। पंजाब से प्रदेश अध्यक्ष समेत कई नेता दिल्ली पहुंच चुके हैं। रविवार या सोमवार तक पंजाब कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष पर फैसला होने की संभावना है।
चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चल रही गुटबाजी और प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर जारी अटकलों के बीच विजय इंदर सिंगला का नाम सबसे प्रमुख दावेदार के रूप में सामने आया है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि कांग्रेस हाईकमान ने उनके नाम को मंजूरी दे दी है और अब औपचारिक घोषणा का इंतजार है। हालांकि कांग्रेस की ओर से खबर लिखे जाने तक आधिकारिक नियुक्ति पत्र सार्वजनिक नहीं किया गया था।
पंजाब कांग्रेस के मौजूदा अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को बदले जाने की चर्चा गुरुवार को और तेज हो गई। वड़िंग ने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल में खुद को “पूर्व पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष” के रूप में दिखाया, जिससे नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को और बल मिला। हालांकि पार्टी हाईकमान ने उनके उत्तराधिकारी के नाम की औपचारिक घोषणा अभी नहीं की है।
रिपोर्टों के मुताबिक पूर्व मंत्री और कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य विजय इंदर सिंगला इस पद की दौड़ में सबसे आगे हैं। सिंगला पंजाब सरकार में शिक्षा, लोक निर्माण और आईटी जैसे विभाग संभाल चुके हैं। पार्टी के भीतर उनके अलावा परगट सिंह, सुखबिंदर सिंह सरकारिया, राणा केपी सिंह, चरणजीत सिंह चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा जैसे नेताओं के नाम भी चर्चा में रहे हैं।
पंजाब कांग्रेस में पिछले कुछ महीनों से अलग-अलग गुटों के बीच मतभेद खुलकर सामने आते रहे हैं। खासतौर पर राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थकों के बीच खींचतान की खबरें आती रही हैं। पार्टी हाईकमान ने जुलाई में वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष पद पर बनाए रखा था, जबकि चन्नी को चुनाव अभियान से जुड़ी जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बावजूद संगठन के भीतर मतभेद पूरी तरह खत्म नहीं हुए।
पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस संगठन को एकजुट करने की कोशिश कर रही है। इसी क्रम में सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी बनाए जाने के बाद राज्य के विभिन्न नेताओं से लगातार बातचीत की गई। रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी नेतृत्व राज्य इकाई में बदलाव के जरिए अलग-अलग गुटों के बीच समन्वय बेहतर करना चाहता है।
विजय इंदर सिंगला ने खुद प्रदेश अध्यक्ष बनने की अटकलों पर स्पष्ट पुष्टि नहीं की है। उन्होंने कहा है कि वह पार्टी के वफादार कार्यकर्ता हैं और संगठन जो जिम्मेदारी देगा, उसे निभाएंगे। अब सभी की नजर कांग्रेस हाईकमान की आधिकारिक घोषणा पर है। यदि सिंगला के नाम की पुष्टि होती है, तो उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के विभिन्न गुटों को साथ लाने और विधानसभा चुनाव से पहले संगठनात्मक तैयारियों को गति देने की होगी।
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