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जनहित याचिका: जब सुप्रीम कोर्ट हुआ नाराज, जानें पूरा मामला

jantaserishta.com
15 July 2022 9:36 AM IST
जनहित याचिका: जब सुप्रीम कोर्ट हुआ नाराज, जानें पूरा मामला
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न्यूज़ क्रेडिट: आजतक

नई दिल्ली: आए दिन जनहित याचिका दायर करने वाले भाजपा नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय से सुप्रीम कोर्ट नाराज दिखा. सर्वोच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस एनवी रमणा, जस्टिस कृष्णमुरारी और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ के सामने मेंशनिंग के समय हिजाब मामले के साथ ही समान ड्रेस कोड को लेकर एक जनहित याचिका पर भी सुनवाई करने की गुहार लगाई गई. इस पर कोर्ट ने उन्हें खरी-खरी सुनाई. जस्टिस रमणा ने कहा कि अगर आप रोज एक जनहित याचिका दायर करेंगे तो हमें जल्दी ही एक विशेष अदालत का गठन करना होगा.

सुप्रीम कोर्ट ने लगातार PIL दाखिल करने वाले अश्विनी उपाध्याय के तत्काल सुनवाई के अनुरोध पर विचार करने से इनकार कर दिया.
उपाध्याय ने अपने बेटे निखिल उपाध्याय की याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की थी. याचिका में देशभर के शैक्षणिक संस्थानों के लिए एक समान ड्रेस कोड की मांग की गई है. उपाध्याय ने मांग की कि याचिका को अगले सप्ताह हिजाब मामले के साथ सूचीबद्ध किया जाए.
इस अपील पर CJI एनवी रमणा ने कहा कि पहले भी मैंने आपको कई बार बताया है कि आप प्रतिदिन एक जनहित याचिका दायर करते हैं, तो हमें एक विशेष अदालत का गठन करना होगा. बताइए आपने कितनी बार मुकदमा दायर किया है? आप हर रोज एक जनहित याचिका दायर करते हैं? हिजाब मामला बहुत पहले दायर किया गया था. हर मामले में जनहित याचिका दायर नहीं कर सकते. क्या संसद नहीं चल रही है?
CJI जस्टिस रमणा पहले भी उपाध्याय की सीरियल याचिकाओं पर अपना सख्त रुख जाहिर कर चुके हैं. इस साल अप्रैल में जब उपाध्याय ने अवैध प्रवासियों को निर्वासित करने की अपनी याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने की मांग की थी, तब भी CJI ने कहा था कि सब कुछ के लिए याचिका दायर की जा रही है. तब तो हर रोज मुझे सिर्फ आपका मामला ही सुनना पड़ेगा. सभी समस्याएं, संसद सदस्यों के मुद्दे, नामांकन के मुद्दे, चुनाव सुधार ये सभी राजनीतिक मुद्दे हैं. आप सरकार के पास क्यों नहीं जाते? वहां जाएं.
अगर न्यायालय सभी राजनीतिक मुद्दों पर सुनवाई करेंगे, तो राजनीतिक प्रतिनिधि किस लिए हैं? CJI ने आगे कहा कि कुछ मामले संसद पर विचार-विमर्श के लिए छोड़ देने चाहिए. उपाध्याय के बेटे निखिल की याचिका में सभी पंजीकृत और मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों में कर्मचारियों और छात्रों के लिए एक समान ड्रेस कोड को सख्ती से लागू करने की मांग की गई है.

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