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Delhi दिल्ली: विश्वविद्यालय के प्रोफेसर संजय सिंह बघेल ने हाल ही में दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ग्लोबल AI समिट को एक ऐतिहासिक कदम बताया। उनका कहना है कि यह समिट केवल कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) पर केंद्रित नहीं था, बल्कि यह भारत की वैश्विक स्तर पर तकनीकी और बौद्धिक क्षमता को प्रदर्शित करने वाली एक महत्वपूर्ण घटना थी।
बघेल ने 1990 के दशक में भारत द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी (IT) को अपनाने के महत्व की तुलना करते हुए कहा कि जैसे उस समय IT ने भारत को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई, वैसे ही यह AI समिट भी भारतीय प्रतिभा को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का अवसर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि AI, डिजिटल तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में यह कदम भविष्य के लिए एक रणनीतिक मोड़ साबित होगा।
प्रोफेसर ने यह भी बताया कि इस समिट का उद्देश्य भारतीय नवाचारों, स्टार्टअप्स और तकनीकी कौशल को वैश्विक निवेशकों और विशेषज्ञों के सामने प्रस्तुत करना था। उनका कहना है कि भारत का यह पहल वैश्विक स्तर पर तकनीकी सहयोग और रणनीतिक भागीदारी बढ़ाने में मदद करेगा।
संजय सिंह बघेल ने कहा कि जैसे 1990 के दशक में IT ने रोजगार, शिक्षा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए अवसर खोले, वैसे ही AI और मशीन लर्निंग के क्षेत्र में भारत को नई संभावनाएं मिल रही हैं। उन्होंने सरकार और शैक्षणिक संस्थानों को इस दिशा में निरंतर समर्थन और प्रशिक्षण बढ़ाने की सलाह दी। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि यह समिट भारत की वैश्विक तकनीकी महाशक्ति बनने की दिशा में एक निर्णायक कदम है, जो आने वाले वर्षों में देश के डिजिटल और आर्थिक विकास को गति देगा।
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