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6 महीने क्लीनिक नहीं पहुंचने का आरोप, विधायक की भतीजी डॉक्टर पर जांच शुरू
jantaserishta.com
16 Sept 2026 4:17 PM IST

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कॉलेज ने पढ़ाई की इजाजत दी थी.
बागलकोट: कर्नाटक के बागलकोट में एक सरकारी क्लीनिक की डॉक्टर को लेकर विवाद सामने आया है। डॉ. अंकिता यरगल पर आरोप है कि उन्होंने मेडिकल ऑफिसर की नौकरी छोड़े बिना निजी मेडिकल कॉलेज में फुलटाइम PG की पढ़ाई शुरू कर दी। इसी दौरान उनके क्लीनिक में ड्यूटी करने को लेकर भी सवाल उठे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, डॉ. अंकिता को हर महीने 70 हजार रुपये से ज्यादा सैलरी मिलती थी। आरोप है कि कई महीनों तक क्लीनिक में ड्यूटी नहीं करने के बावजूद उनका सरकारी भुगतान जारी रहा। मामला सामने आने के बाद अब अधिकारियों ने उनकी नौकरी, गैरहाजिरी और PG की पढ़ाई से जुड़े पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
डॉ. अंकिता बागलकोट से कांग्रेस विधायक उमेश मेटी की भतीजी हैं। उनके पिता राजकुमार यरगल जिले के स्वास्थ्य अधिकारी हैं। मामला सामने आने के बाद डॉ. अंकिता को क्लीनिक की ड्यूटी से हटाने के निर्देश भी दिए गए।
मार्च से क्लीनिक नहीं पहुंचने का आरोप
डॉ. अंकिता अप्रैल 2025 से बागलकोट की वाम्बे कॉलोनी में बने नम्मा क्लीनिक में मेडिकल ऑफिसर के तौर पर काम कर रही थीं। उनकी नियुक्ति कॉन्ट्रैक्ट या आउटसोर्स व्यवस्था के तहत हुई थी।
इसके बाद उन्होंने मार्च में निजी मेडिकल कॉलेज में PG में दाखिला लिया। आरोप है कि 3 मार्च से सितंबर तक वह क्लीनिक की ड्यूटी पर नहीं गईं, जबकि उनकी नौकरी बनी रही। इसी वजह से अधिकारियों ने यह पता लगाने की प्रक्रिया शुरू की है कि एक डॉक्टर एक साथ फुलटाइम पढ़ाई और सरकारी क्लीनिक की नौकरी कैसे कर रही थीं। क्लीनिक में डॉक्टर की मौजूदगी नहीं होने से वहां इलाज के लिए आने वाले लोगों को परेशानी होने की बात भी सामने आई है। इसी शिकायत के बाद मामले ने तूल पकड़ा।
कॉलेज ने पढ़ाई की इजाजत दी थी
जिला पंचायत CEO गजानन बाले के नोटिस में बताया गया है कि SN मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने डॉ. अंकिता को PG करने की अनुमति दी थी।
लेकिन अधिकारियों का कहना है कि कॉलेज से पढ़ाई की अनुमति मिलना अलग बात है और सरकारी क्लीनिक की ड्यूटी से छुट्टी मिलना अलग। इसलिए अब यह देखा जा रहा है कि डॉ. अंकिता को क्लीनिक से गैरहाजिर रहने की भी अनुमति थी या नहीं।
जांच में अगर यह साबित होता है कि उन्होंने नियमों के खिलाफ नौकरी के दौरान फुलटाइम PG की और उसी समय सरकारी सैलरी भी ली, तो उनसे मिली रकम वापस लेने की कार्रवाई हो सकती है।
18 सितंबर को फिर होगी सुनवाई
इस मामले में 15 सितंबर को जिला पंचायत कार्यालय में सुनवाई होनी थी, लेकिन डॉ. अंकिता वहां नहीं पहुंचीं। अब उन्हें 18 सितंबर को सुबह 10 बजे दोबारा बुलाया गया है। उन्हें जिला पंचायत कार्यालय के कमरा नंबर 11 में अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है।
अधिकारियों ने साफ किया है कि अगर वह अगली सुनवाई में भी नहीं आती हैं, तो उनके बिना ही मामले में फैसला लिया जा सकता है।
आगे की जांच में यह भी देखा जाएगा कि डॉक्टर की नौकरी और मेडिकल पढ़ाई के बीच नियमों का पालन हुआ था या नहीं। जरूरत पड़ने पर मामले को कर्नाटक मेडिकल काउंसिल और नेशनल मेडिकल कमीशन के पास भी भेजा जा सकता है।
पिता ने नियुक्ति पर क्या कहा?
डॉ. अंकिता के पिता राजकुमार यरगल ने अपनी बेटी की नियुक्ति को लेकर सफाई दी है। उनका कहना है कि जब उनकी बेटी को नौकरी मिली थी, तब वह जिले के DHO नहीं थे। उनके मुताबिक उस समय मंजूनाथ डोड्डेरी इस पद पर थे।
राजकुमार यरगल ने कहा कि DHO बनने के बाद उन्होंने अपनी बेटी का वेतन जारी नहीं किया था। उन्होंने तालुक स्वास्थ्य अधिकारी को डॉ. अंकिता को क्लीनिक की ड्यूटी से हटाने के निर्देश भी दिए थे।
वहीं स्थानीय कार्यकर्ता राजू नाइक ने आरोप लगाया है कि डॉ. अंकिता ने मार्च में पैथोलॉजी की PG शुरू की, लेकिन सरकारी नौकरी नहीं छोड़ी। अब 18 सितंबर की सुनवाई और उसके बाद होने वाली जांच से इस मामले में आगे की स्थिति साफ होगी।
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