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प्राइवेट फैक्ट्रियां सरकारी जमीन में हो रही थी संचालित, कीमत 101 करोड़, प्रशासन ने किया सील

Nil dhankar
8 July 2026 7:58 AM IST
प्राइवेट फैक्ट्रियां सरकारी जमीन में हो रही थी संचालित, कीमत 101 करोड़, प्रशासन ने किया सील
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यूपी। संभल में संभल-मुरादाबाद स्टेट हाइवे के किनारे 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की सरकारी जमीन 60 साल बाद राज्य सरकार के नाम दर्ज हुई है. इसके बाद यहां बने स्ट्रक्चर पर प्रशासन ने एक और बड़ी कार्रवाई की है. यहां 101 करोड़ रुपये कीमत की 38 बीघा सरकारी जमीन पर मेंथा फैक्ट्री, दुकान और हड्डी फैक्ट्री थी. इन फैक्ट्रियों के साथ ही पांच संपत्तियों को सील कर दिया गया है. तहसीलदार ने एक दर्जन लेखपाल और पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचकर इस कार्रवाई को अंजाम दिया.

दरअसल, 59 साल पहले संभल नगर पालिका के द्वारा किए गए फर्जी पट्टे के आधार पर 101 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन का घोटाला सामने आया. इसके बाद DDC कोर्ट के आदेश पर एक हफ्ते पहले संभल-मुरादाबाद स्टेट हाइवे के किनारे स्थित 38 बीघा सरकारी जमीन को राज्य सरकार के नाम दर्ज कर दिया गया था. वहीं खतौनी से भू-माफियाओं के नाम हटा दिए गए थे. इस जमीन घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद लेखपाल की तहरीर के आधार पर पुलिस ने तत्कालीन DDC, तत्कालीन नगर पालिका ईओ, नगर पालिका के कई कर्मचारी, कई नेताओं के परिवार के लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था. इसके बाद पुलिस ने इस मामले में नामजद शाहजहांपुर नगर निगम के सहायक नगर आयुक्त और संभल नगर पालिका के तत्कालीन ईओ राजकुमार गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया था.

इलाके के ग्राम प्रधान की शिकायत के आधार पर तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह एक दर्जन लेखपाल और पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे. इस दौरान टीम ने मेंथा फैक्ट्री, हड्डी फैक्ट्री, एक दुकान सहित पांच संपत्तियों को सील कर दिया. पुलिस प्रशासन ने मौके पर फैक्ट्री के अंदर मौजूद लोगों को बाहर निकलवाया और फिर उसमें ताला लगा दिया.

इस कार्रवाई के बाद माना जा रहा है कि 38 बीघा जमीन पर बने स्ट्रक्चर को हटाने के लिए संभल प्रशासन जल्द धारा 67 की कार्रवाई शुरू कर सकता है और आने वाले दिनों में स्ट्रक्चर को ध्वस्त करने के लिए बुलडोजर एक्शन भी हो सकता है. तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि संभल में ग्राम समाज की संपत्ति की लूट का यह बड़ा मामला है. पहले भी संभल में ग्राम समाज की संपत्तियों पर कब्जा हुआ है. उसी क्रम में वर्ष 2008 में उप संचालक चकबंदी न्यायालय से नगर पालिका से एक कथित पट्टे के आधार पर इन लोगों ने जमीन कब्जे में ले ली थी, जबकि नगर पालिका को पट्टा करने का कोई अधिकार नहीं है.

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