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चेरियाल पेंटिंग और चांदी की वीणा प्रिंस रहीम आगा खान V को भेंट
Hyderabad: हैदराबाद: प्रिंस रहीम आगा खान V, हैदराबाद पहुँचे, भारत में 9 से 15 सितंबर तक निर्धारित दौरे के तहत वे अब अपनी यात्रा के अंतिम पड़ाव पर हैं। दौरे के दौरान उन्होंने विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और समुदाय के लोगों से मुलाकात की। मंगलवार को हैदराबाद में वे अपनी जमात के लोगों को दीदार-दर्शन देंगे। इस अवसर पर बड़ी संख्या में समुदाय के लोगों के शामिल होने की संभावना है। हैदराबाद का कार्यक्रम उनके भारत दौरे का अंतिम प्रमुख कार्यक्रम होगा। दीदार-दर्शन और अन्य निर्धारित कार्यक्रमों के समापन के बाद वे देर शाम अपने देश के लिए रवाना होंगे। इसके साथ ही उनका भारत दौरा संपन्न हो जाएगा।
हैदराबाद स्थित लोक भवन में प्रिंस रहीम आगा खान V को तेलंगाना की पारंपरिक कला और शिल्प से जुड़ी दो विशेष कलाकृतियां भेंट की गईं। इनमें ग्रामीण तेलंगाना के पारंपरिक जीवन को दर्शाती चेरियाल नकाशी पेंटिंग और हंस की आकृति से सजी करीमनगर सिल्वर फिलिग्री वीणा शामिल है। तेलंगाना के राज्यपाल के आधिकारिक एक्स हैंडल पर साझा जानकारी के अनुसार, यह भेंट राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक और हस्तशिल्प परंपरा को प्रदर्शित करती है। चेरियाल नकाशी तेलंगाना की विशिष्ट लोक चित्रकला परंपराओं में शामिल है। इसमें स्थानीय जीवन, लोककथाओं और पारंपरिक सामाजिक-सांस्कृतिक दृश्यों को चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है।
प्रिंस रहीम आगा खान V को भेंट की गई चेरियाल नकाशी पेंटिंग में तेलंगाना के ग्रामीण जीवन के एक पारंपरिक दृश्य को दर्शाया गया है। इस कलाकृति के जरिए राज्य की लोक संस्कृति और ग्रामीण परंपराओं की झलक प्रस्तुत की गई। इसके साथ ही उन्हें करीमनगर की प्रसिद्ध सिल्वर फिलिग्री कला से तैयार वीणा भी भेंट की गई। इस कलाकृति में आकर्षक हंस की आकृति का इस्तेमाल किया गया है। चांदी के बेहद बारीक काम के लिए करीमनगर की फिलिग्री कला अपनी अलग पहचान रखती है। कारीगर चांदी के महीन तारों के जरिए जटिल और आकर्षक डिजाइन तैयार करते हैं।
वीणा भारतीय संगीत परंपरा से जुड़ा प्रमुख वाद्य यंत्र है, जबकि हंस भारतीय कला और सांस्कृतिक प्रतीकों में विशेष स्थान रखता है। ऐसे में सिल्वर फिलिग्री तकनीक से तैयार यह कलाकृति तेलंगाना के पारंपरिक शिल्प और भारतीय सांस्कृतिक प्रतीकों का संगम प्रस्तुत करती है। प्रिंस रहीम आगा खान V की हैदराबाद यात्रा के दौरान हुई यह भेंट तेलंगाना की कला और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने का अवसर भी बनी। चेरियाल नकाशी और करीमनगर सिल्वर फिलिग्री जैसी पारंपरिक कलाएं राज्य के कारीगरों की पीढ़ियों से चली आ रही शिल्प परंपरा का प्रतिनिधित्व करती हैं।
इस तरह की सांस्कृतिक भेंट के माध्यम से स्थानीय कला और हस्तशिल्प को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने का अवसर भी मिलता है। साथ ही यह नई पीढ़ी को पारंपरिक कलाओं के संरक्षण और उनके महत्व से परिचित कराने में मददगार हो सकती है। लोक भवन में हुई इस मुलाकात के दौरान दी गई दोनों कलाकृतियां तेलंगाना की सांस्कृतिक विविधता, ग्रामीण जीवन और शिल्प कौशल की झलक पेश करती हैं।
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